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भारतीय शेयर बाजार में कोहराम: ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों से सेंसेक्स 479 अंक टूटा

भारतीय शेयर बाजार में कोहराम: ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों से सेंसेक्स 479 अंक टूटा
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भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन भारी बिकवाली और गिरावट वाला रहा। बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, लाल निशान में बंद हुए और इस गिरावट का मुख्य कारण बैंकिंग, तेल और गैस, और फार्मा सेक्टर के शेयरों में देखी गई बड़ी बिकवाली थी। दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों के बाद निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया, जिससे बाजार में डर का माहौल दिखा। हालांकि, फ्रंटलाइन इंडेक्स में गिरावट के बावजूद ब्रॉडर मार्केट्स में कुछ मजबूती देखी गई, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

बाजार में गिरावट के तीन प्रमुख कारण

मंगलवार को बाजार में आई इस गिरावट के पीछे तीन बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे। पहला और सबसे बड़ा कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है। अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान में किए गए हमलों ने इस क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की चिंताओं को फिर से जीवित कर दिया है। दूसरा महत्वपूर्ण कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है, जो एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गई हैं। तीसरा बड़ा कारण भारतीय रुपये की कमजोरी रही, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर नए निचले स्तर पर पहुंच गया और इन तीनों कारकों ने मिलकर निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाई।

सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 76,010 के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें लगभग 479 अंकों या 0 दशमलव 63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 23,933 के स्तर पर बंद हुआ, जो सोमवार के मुकाबले 98 अंक या 0 दशमलव 41 प्रतिशत नीचे था। बाजार में सबसे ज्यादा गिरावट झेलने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, टीसीएस, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और टाइटन शामिल रहे। इसके विपरीत, टेक महिंद्रा, इटरनल, मारुति सुजुकी और एचयूएल के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0 दशमलव 5 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0 दशमलव 35 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

विशेषज्ञों की राय और भू-राजनीतिक तनाव

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के विनोद नायर ने बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की जो उम्मीदें बनी थीं, वे दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद समाप्त हो गई हैं। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी ला दी और रुपये में आई हालिया मजबूती को भी खत्म कर दिया और नायर ने बताया कि महीने की एफएंडओ एक्सपायरी के कारण तकनीकी बिकवाली का दबाव भी बाजार पर हावी रहा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल की कीमतें साप्ताहिक आधार पर अभी भी निचले स्तर पर हैं, जिससे बाजार को उम्मीद है कि तनाव कम हो सकता है।

वैश्विक बाजारों की स्थिति

वैश्विक स्तर पर मंगलवार को अमेरिकी स्टॉक इंडेक्स फ्यूचर्स ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ। अमेरिकी निवेशक मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बावजूद शांति वार्ताओं को लेकर आशान्वित दिखे। चिप स्टॉक्स में एआई आधारित तेजी ने भी वहां के बाजार को सहारा दिया। डॉव जोन्स फ्यूचर्स में 0 दशमलव 48 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 0 दशमलव 52 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स में 0 दशमलव 77 प्रतिशत की तेजी देखी गई। यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जहां ब्रिटेन का एफटीएसई 100 इंडेक्स 0 दशमलव 7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जर्मनी का डैक्स इंडेक्स 0 दशमलव 7 प्रतिशत गिर गया। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 0 दशमलव 25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64,996 दशमलव 09 पर बंद हुआ, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी इंडेक्स 2 दशमलव 6 प्रतिशत की बढ़त के साथ नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया।

कच्चे तेल और रुपये की स्थिति

कच्चे तेल के बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 4 प्रतिशत के उछाल के साथ 100 डॉलर के करीब पहुंच गईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि उसने दक्षिणी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइटों और उन नावों पर हमले किए हैं जो बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं। इस सैन्य कार्रवाई को रक्षात्मक बताया गया है। मुद्रा बाजार की बात करें तो, मंगलवार को भारतीय रुपया 0 दशमलव 47 प्रतिशत कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 रुपये 68 पैसे पर बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95 रुपये 23 पैसे पर बंद हुआ था। रुपये की इस कमजोरी ने बाजार की गिरावट को और गहरा कर दिया।

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