वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 1 करोड़ रुपये का फंड देने की घोषणा की है। यह राशि विशेष रूप से उन प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए उपयोग की जाएगी जो सरकारी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। सोमवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. कपिल सिब्बल के साथ सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रंका व रत्ना सिंह भी मौजूद थे। इस दौरान आंदोलन को कानूनी रूप से मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं।
राष्ट्रीय कानूनी सहायता ढांचे का विजन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सौरव दास ने बताया कि 25 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना समाप्त होने से पहले ही सीजेपी नेतृत्व को इस बात की आशंका थी कि भाजपा शासित सरकारों द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्हें डर था कि देश भर में कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने और उन पर आपराधिक मामले दर्ज करके परेशान किया जा सकता है। इन्हीं चिंताओं को लेकर सीजेपी नेतृत्व ने डॉ. कपिल सिब्बल से मुलाकात की थी। डॉ. सिब्बल ने सलाह दी कि आंदोलन को देश भर में वकीलों का एक नेटवर्क बनाकर एक मजबूत राष्ट्रीय कानूनी सहायता ढांचा तैयार करना चाहिए। यह नेटवर्क उन सभी प्रदर्शनकारियों की मदद करेगा जिन्हें सरकार की दमनकारी नीतियों का सामना करना पड़ रहा है।
1 करोड़ रुपये का समर्पित कानूनी फंड
डॉ. कपिल सिब्बल ने युवा आंदोलन के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि वह सीजेपी को आने वाली किसी भी कानूनी बाधा को दूर करने में मदद करेंगे। उन्होंने सीजेपी कानूनी सहायता सेल की स्थापना और उसके सुचारू कामकाज के लिए 1 करोड़ रुपये का फंड देने का वादा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि इस फंड का उपयोग केवल और केवल प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने के लिए किया जाएगा। डॉ और सिब्बल ने इस फंड के प्रभावी उपयोग का निर्णय सीजेपी नेतृत्व पर छोड़ दिया है। उनका विजन है कि भारत के हर जिले में वकीलों का समर्थन प्राप्त हो ताकि कोई भी छात्र या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी कानूनी प्रतिनिधित्व से वंचित न रहे।
साक्षी पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ
org पर 'साक्षी' (SAAKSHI) प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की। यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उन प्रदर्शनकारियों के लिए बनाया गया है जिन्होंने 20 जुलाई के 'चलो संसद मार्च' में हिस्सा लिया था। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदर्शनकारी अपने साथ हुई पुलिस की बर्बरता और ज्यादती की तस्वीरों और वीडियो को सुरक्षित रूप से अपलोड कर सकते हैं। वेबसाइट पर इस प्लेटफॉर्म के उपयोग के बारे में एक विस्तृत ट्यूटोरियल भी उपलब्ध कराया गया है। दास ने सभी प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस हिंसा से जुड़े सभी विजुअल सबूत इस पर अपलोड करें ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
पुलिस और सुरक्षा बलों की जवाबदेही
सीजेपी नेतृत्व ने संकल्प लिया है कि शांतिपूर्ण छात्रों के खिलाफ गैर-कानूनी हिंसा के लिए जिम्मेदार हर पुलिस अधिकारी और आरएएफ (RAF) जवान की पहचान की जाएगी। चाहे उन्होंने छात्रों के सिर को निशाना बनाया हो, गंभीर चोटें पहुंचाई हों, हड्डियां तोड़ी हों या पैलेट गन का इस्तेमाल किया हो, उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा। डॉ. कपिल सिब्बल के मार्गदर्शन और देशव्यापी कानूनी नेटवर्क की मदद से पार्टी उचित शिकायतें दर्ज करने, एफआईआर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने और सक्षम अदालतों में कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रवक्ता रत्ना सिंह ने बिहार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में छात्रों की हिरासत और गिरफ्तारी पर चिंता जताई और कहा कि वह इन राज्यों में वकीलों के साथ तालमेल बिठा रही हैं ताकि हर प्रभावित व्यक्ति को तुरंत कानूनी मदद मिल सके।
सरकार को अंतिम चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंतिम चरण में प्रवक्ता आशुतोष रंका ने सरकार के साथ हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच तीसरे दौर की बातचीत हुई थी। इस बातचीत में सरकार इस बात पर सहमत हुई थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और दंडात्मक कार्रवाई वापस ले ली जाएगी। सरकार ने इस संबंध में मंगलवार तक लिखित गारंटी देने का वादा किया था। रंका ने चेतावनी दी कि यदि सरकार मंगलवार तक लिखित आश्वासन देने में विफल रहती है या उत्पीड़न जारी रखती है, तो कॉकरोच जनता पार्टी अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होगी। पार्टी ने सरकार से अपने वादों का सम्मान करने का आग्रह किया है।