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सुपर अल-नीनो की चेतावनी: भारत में भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का मंडराया खतरा

सुपर अल-नीनो की चेतावनी: भारत में भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का मंडराया खतरा
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देशभर में इस समय भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है और तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। इस प्रचंड गर्मी के बीच मौसम वैज्ञानिकों ने वर्ष 2026 में संभावित सुपर अल-नीनो को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस भौगोलिक घटना के कारण भारत में हीटवेव की स्थिति और भी भयावह हो सकती है और इसके परिणामस्वरूप मानसून के कमजोर पड़ने और कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की प्रबल आशंका है। वर्तमान में भारत दुनिया के सबसे अधिक तपते देशों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को दर्शाता है।

दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारतीय शहरों का दबदबा

रियल टाइम ग्लोबल तापमान रैंकिंग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं, क्योंकि दुनिया के टॉप 100 सबसे गर्म शहरों में सभी शहर भारत के ही बताए जा रहे हैं। विशेष रूप से 20 मई को उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान का स्तर इतना अधिक दर्ज किया गया कि इसकी गिनती दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में होने लगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस दिन बांदा से अधिक पारा केवल मिस्र के असवान और सऊदी अरब के अराफात में ही दर्ज किया गया था। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल सामान्य मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के उन गंभीर संकेतों को दर्शाती है जो भविष्य के लिए चिंताजनक हैं।

क्या है सुपर अल-नीनो और इसका वैज्ञानिक आधार

मौसम वैज्ञानिकों ने वर्ष 2026 में सुपर अल-नीनो बनने की आशंका जताई है। अल-नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति होती है, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इस बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर हवाओं और बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल जाता है और विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार समुद्र का तापमान सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा बढ़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह अब तक का सबसे शक्तिशाली अल-नीनो साबित हो सकता है, जिसे वैज्ञानिक सुपर अल-नीनो का नाम दे रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक मौसम चक्र पर पड़ेगा।

भारत पर होने वाले संभावित प्रभाव और पिछला अनुभव

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपर अल-नीनो का असर भारत पर बहुत गंभीर हो सकता है और इससे न केवल हीटवेव की घटनाएं बढ़ेंगी, बल्कि गर्मी का सीजन भी सामान्य से अधिक लंबा खिंच सकता है। इसके अलावा मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ने की आशंका है, जिससे देश में बारिश की कमी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं। यदि हम इतिहास पर नजर डालें, तो वर्ष 2023 में भी एक मजबूत अल-नीनो के दौरान देश के कई हिस्सों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और मानसून काफी कमजोर रहा था। 2026 की चेतावनी इससे भी अधिक गंभीर मानी जा रही है।

मई और जून में गर्मी बढ़ने का वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिकों ने विस्तार से बताया है कि मई के अंत और जून की शुरुआत में गर्मी इतनी प्रचंड क्यों हो जाती है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 23 दशमलव 5 डिग्री झुकाव के साथ करती है। इस दौरान सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर पहुंच जाता है और ऐसी स्थिति में उत्तरी गोलार्ध, जिसमें भारत स्थित है, सूर्य की ओर सबसे ज्यादा झुका होता है। इसके कारण सूर्य की किरणें भारत के मैदानी इलाकों पर लगभग सीधी पड़ती हैं और सीधी किरणें पड़ने से जमीन ज्यादा सौर ऊर्जा सोखती है और तेजी से गर्म होती है। चूंकि इस समय दिन लंबे और रातें छोटी होती हैं, इसलिए धरती को रात में ठंडा होने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। मौसम वैज्ञानिक इस पूरी प्रक्रिया को प्री-मॉनसून मैक्सीमम हीटिंग पीरियड कहते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग और बचाव के उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हर साल गर्मी की तीव्रता और उसकी अवधि बढ़ती जा रही है। हालिया शोधों में यह पाया गया है कि भारत में हीटवेव का प्रभाव अब उन क्षेत्रों में भी दिखने लगा है जो पहले ठंडे माने जाते थे। नए हीट हॉटस्पॉट का बनना एक बड़ी चुनौती है। मौसम वैज्ञानिकों ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ पीने का सुझाव दिया गया है। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर विशेषज्ञों की पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि सुपर अल-नीनो भारत की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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