गॉल में श्रीलंका के खिलाफ होने वाले पहले टेस्ट मैच से पहले भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मॉर्ने मॉर्कल ने अपने तेज गेंदबाजों के लिए एक विशेष चेतावनी जारी की है। मॉर्कल ने स्पष्ट किया है कि श्रीलंका की परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती गेंद का व्यवहार होगी। उन्होंने बताया कि श्रीलंका में इस्तेमाल होने वाली गेंद लगभग 150 से 200 गेंदों के बाद यानी करीब 25 से 30 ओवर के खेल के बाद अपनी कठोरता खो देती है और नरम हो जाती है। मॉर्कल के अनुसार, तेज गेंदबाजों के पास गॉल टेस्ट में अपना प्रभाव छोड़ने के लिए बहुत कम समय होगा क्योंकि एक बार गेंद नरम हो गई, तो बल्लेबाजों को परेशान करना और विकेट निकालना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
कूकाबूरा बनाम एसजी गेंद का तकनीकी अंतर
मॉर्कल ने भारत और श्रीलंका में इस्तेमाल होने वाली गेंदों के बीच के बड़े अंतर को समझाया है। भारत में टेस्ट मैचों के दौरान एसजी गेंदों का उपयोग किया जाता है, जिनकी सिलाई यानी सीम काफी उभरी हुई होती है। यह उभरी हुई सीम गेंद को लंबे समय तक सख्त बनाए रखने में मदद करती है। इसके विपरीत, श्रीलंका में कूकाबूरा गेंद का इस्तेमाल होता है जिसकी सिलाई अंदर की ओर दबी होती है। दबी हुई सिलाई के कारण कूकाबूरा गेंद जल्दी घिस जाती है और अपनी चमक और कठोरता खो देती है। मॉर्कल ने कहा कि हमारे पास कौशल और योजना तो है, लेकिन श्रीलंका में सबसे बड़ी चुनौती यहां का मौसम, उमस और कूकाबूरा की गेंद है। उन्होंने गेंदबाजों को सलाह दी है कि वे छोटे स्पेल में पूरी ताकत के साथ सही जगह पर गेंदबाजी करें ताकि गेंद के नरम होने से पहले उसका फायदा उठाया जा सके।
दूसरे तेज गेंदबाज के लिए चयन की जंग
गॉल टेस्ट के लिए भारतीय टीम के प्लेइंग इलेवन में दूसरे तेज गेंदबाज के स्थान को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है और मोहम्मद सिराज का खेलना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन दूसरे स्थान के लिए प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ के बीच सीधी टक्कर है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, टीम मैनेजमेंट युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को टेस्ट डेब्यू का मौका दे सकता है। गुरनूर ने वॉर्मअप मैच में अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया था। इसके अलावा, उन्होंने इंडिया-ए की ओर से श्रीलंका-ए के खिलाफ खेलते हुए कुल 10 विकेट हासिल किए थे। अपनी शानदार गति और उछाल के कारण वह श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं। श्रीलंका के कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी गुरनूर बराड़ की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें भारतीय टीम के लिए एक बड़ा हथियार बताया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कप्तान और कोच अनुभव को प्राथमिकता देते हैं या गुरनूर की फॉर्म को।