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आपके घर में रखा सोना बचा सकता है इकोनॉमी की जान, जानें कैसे बदल सकता है गेम

आपके घर में रखा सोना बचा सकता है इकोनॉमी की जान, जानें कैसे बदल सकता है गेम
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भारतीय घरों में रखा सोना केवल गहना नहीं बल्कि एक बड़ी आर्थिक शक्ति है और भारतीय परिवारों के पास करीब 25000 टन सोना जमा होने का अनुमान है। यह सोना घरों और बैंक लॉकरों में पड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस सोने का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत सुधारने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। वर्तमान में वैश्विक तनाव के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से अपील की थी कि वे कम से कम 1 साल तक सोना न खरीदें। इस अपील के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

आयात बिल और इकोनॉमी पर सोने का असर

भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। भारत हर साल लगभग 600 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। इस भारी आयात के कारण देश का बहुत सारा पैसा बाहर चला जाता है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता है। इसी को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। अगर भारतीय लोग बाहर से नया सोना खरीदने के बजाय अपने पास मौजूद भंडार में से केवल 2 से 3 प्रतिशत सोना भी बाजार में निकाल दें, तो इससे आयात बिल में भारी गिरावट आएगी। इससे न केवल देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा, बल्कि रुपये की कीमत में भी मजबूती आएगी।

इमोशनल एसेट को बनाएं प्रोडक्टिव वेल्थ

भारतीय संस्कृति में सोने के साथ एक गहरा भावनात्मक लगाव जुड़ा होता है। लेकिन अब समय आ गया है कि इसे केवल एक भावनात्मक संपत्ति के बजाय एक उत्पादक संपत्ति के रूप में देखा जाए। ईटी की रिपोर्ट में एलएक्सएमई की फाउंडर प्रीति राठी गुप्ता का कहना है कि घरों में रखा बहुत सा सोना बेकार पड़ा रहता है। महिलाओं और परिवारों को यह सोचना चाहिए कि क्या वे इस सोने को मोनेटाइज कर सकते हैं। फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इसका उद्देश्य सोने से लगाव खत्म करना नहीं, बल्कि अपनी संपत्ति को बेहतर तरीके से काम पर लगाना है ताकि वह देश की प्रगति में भी योगदान दे सके।

प्रॉफिट बुकिंग और विदेशी निवेश का गणित

पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में काफी तेजी आई है। आनंद राठी वेल्थ के जॉइंट सीईओ फिरोज अजीज के अनुसार, जिस तरह लोग शेयर बाजार में मुनाफा कमाते हैं, उसी तरह उन्हें सोने में भी प्रॉफिट बुकिंग करनी चाहिए। उनका मानना है कि अगर भारतीय परिवार अपने गोल्ड का सिर्फ 2 से 4 प्रतिशत हिस्सा भी बेच दें, तो गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता बहुत कम हो जाएगी। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और रुपये को लेकर बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा। जब आयात कम होगा, तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी, जो अंततः देश की जीडीपी और आर्थिक स्थिरता के लिए फायदेमंद साबित होगी।

निवेश के अन्य बेहतर विकल्प

सोना संकट के समय एक सुरक्षित निवेश जरूर है, लेकिन लंबी अवधि में इसके रिटर्न हमेशा सबसे अच्छे नहीं होते। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में सोने का औसत रिटर्न करीब 8 प्रतिशत 50 पॉइंट रहा है। वहीं दूसरी ओर, सुकन्या समृद्धि योजना जैसी सरकारी योजनाएं टैक्स के बाद लगभग 8 प्रतिशत 25 पॉइंट का रिटर्न देती रही हैं। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि लोगों को केवल फिजिकल गोल्ड जमा करने के बजाय इक्विटी, एसआईपी और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों में भी निवेश करना चाहिए। निष्कर्ष यह है कि सोने को केवल लॉकर में बंद रखने के बजाय उसे बाजार में लाना देश के हित में है। इससे आयात बिल कम होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी।

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