'धिक्कार है ऐसे लोगों पर', अनशन तोड़ने पर सवाल उठाने वालों पर भड़के सोनम वांगचुक

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'धिक्कार है ऐसे लोगों पर', अनशन तोड़ने पर सवाल उठाने वालों पर भड़के सोनम वांगचुक
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लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात एक वीडियो संदेश जारी कर उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो उनके अनशन तोड़ने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। वांगचुक ने अपनी निष्ठा और ईमानदारी पर शक करने वालों के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग उनकी नीयत पर सवाल उठा रहे हैं, उन पर उन्हें धिक्कार है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर यह चर्चा चल रही थी कि वांगचुक ने किसी गुप्त समझौते के तहत अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त किया है।

डील के आरोपों पर तीखा प्रहार

इन आरोपों का खंडन करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर उन्हें सरकार के साथ कोई डील या समझौता ही करना होता, तो इसके लिए उन्हें दिल्ली की भीषण गर्मी में 26 दिनों तक भूखा रहने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की डील तो लद्दाख में अपने घर के एयर-कंडीशन्ड (एसी) कमरे में बैठकर भी आराम से की जा सकती थी। उन्होंने सवाल किया कि कोई व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालकर इतनी कठिन परिस्थितियों में अनशन क्यों करेगा, अगर उसका मकसद सिर्फ एक समझौता ही था।

26 दिनों का कठिन संघर्ष

वांगचुक ने दिल्ली की तपती गर्मी और 26 दिनों के लंबे अनशन का जिक्र करते हुए अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि यह संघर्ष उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने उन लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाया जो इस बलिदान को देखने के बावजूद उन पर सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं और उन्होंने कहा कि 26 दिनों तक अन्न का त्याग करना कोई छोटी बात नहीं है और इसके बाद भी अगर लोगों को उनकी ईमानदारी पर भरोसा नहीं है, तो यह बेहद दुखद है।

ईमानदारी साबित करने की चुनौती

" यह सवाल उन सभी आलोचकों के लिए था जो उनके लंबे संघर्ष और लद्दाख के प्रति उनके समर्पण को नजरअंदाज कर रहे हैं। वांगचुक ने साफ कर दिया कि उनका आंदोलन और उनकी नीयत पूरी तरह से पारदर्शी है और वे किसी भी तरह के झूठे आरोपों से विचलित होने वाले नहीं हैं और उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली की गर्मी में 26 दिन का अनशन उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

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