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भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में बढ़ाई युद्धपोतों की तैनाती,तनाव के बीच एनर्जी सप्लाई पर भारतीय नौसेना का पहरा

भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में बढ़ाई युद्धपोतों की तैनाती,तनाव के बीच एनर्जी सप्लाई पर भारतीय नौसेना का पहरा
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकटवर्ती क्षेत्रों में अपने युद्धपोतों की संख्या में वृद्धि कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह निर्णय इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उत्पन्न संभावित खतरों के मद्देनजर लिया गया है। नौसेना का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है।

समुद्री सुरक्षा के इस सघन घेरे के तहत आईएनएस शिवालिक, आईएनएस सुनयना और व्यापारिक जहाज जग लाडकी पहले ही सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच चुके हैं। भारतीय नौसेना के अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में अस्थिरता को देखते हुए निरंतर निगरानी रखी जा रही है ताकि देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए।

ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा

ओमान की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक हैं और भारतीय नौसेना की तैनाती का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय टैंकर बिना किसी बाधा के इस क्षेत्र से गुजर सकें। नौसेना के प्रवक्ता के अनुसार, वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिम में लगभग 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों की आवाजाही पर नौसेना के युद्धपोत और निगरानी विमान निरंतर नजर रख रहे हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, युद्धपोतों को इन व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट करने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के निर्देश दिए गए हैं।

ऑपरेशन संकल्प और एंटी-पायरेसी मिशन

भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में वर्तमान में दो प्रमुख अभियान संचालित कर रही है। पहला 'ऑपरेशन संकल्प' है, जिसे विशेष रूप से ओमान की खाड़ी में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दूसरा अभियान अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती को रोकने के लिए चलाया जा रहा एंटी-पायरेसी ऑपरेशन है। इन दोनों अभियानों के माध्यम से नौसेना न केवल भारतीय हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा में भी योगदान दे रही है।

युद्धपोतों की तैनाती में वृद्धि का विवरण

वर्ष 2019 से 'मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट' के तहत इस क्षेत्र में आमतौर पर 1 से 3 युद्धपोत तैनात रहते थे। हालांकि, वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए नौसेना ने इस संख्या को बढ़ा दिया है। सुरक्षा कारणों और परिचालन गोपनीयता के चलते नौसेना ने तैनात किए गए युद्धपोतों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि तैनाती का स्तर खतरे के आकलन के आधार पर गतिशील रखा गया है। तैनात युद्धपोत उन्नत रडार, मिसाइल प्रणालियों और हेलीकॉप्टरों से लैस हैं, जो किसी भी हवाई या समुद्री खतरे से निपटने में सक्षम हैं।

मिशन आधारित तैनाती की रणनीतिक भूमिका

भारतीय नौसेना वर्ष 2017 से मिशन आधारित तैनाती (Mission Based Deployment) मॉडल पर कार्य कर रही है। इसके तहत भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र के 6 प्रमुख समुद्री इलाकों में स्थायी रूप से तैनात रहते हैं। इस रणनीति का उद्देश्य समुद्री डकैती को रोकना, मानवीय सहायता प्रदान करना, आपदा राहत अभियान चलाना और मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय स्थापित करना है। ओमान की खाड़ी में वर्तमान तैनाती इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो भारत की 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' की भूमिका को और मजबूत करती है।

क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की तैयारी

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है और भारतीय नौसेना के अनुसार, वे स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार हैं। नौसेना के टोही विमान और ड्रोन भी क्षेत्र में निरंतर गश्त कर रहे हैं ताकि युद्धपोतों को वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। यह तैनाती न केवल भौतिक सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग समुदाय के बीच विश्वास भी पैदा करती है। भारत अपनी समुद्री सीमाओं से परे भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।

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