विज्ञापन

भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग सुधरी: 75वें स्थान पर पहुंचा भारत

भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग सुधरी: 75वें स्थान पर पहुंचा भारत
विज्ञापन

भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक शक्ति में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) के विशेष आंकड़ों पर आधारित हेनली पासपोर्ट इंडेक्स (Henley Passport Index) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपनी रैंकिंग में 10 पायदानों का सुधार किया है। भारत अब वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में 75वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 85वें स्थान पर था। इस सुधार के साथ ही भारतीय नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा के रास्ते और अधिक सुगम हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब भारतीय पासपोर्ट धारक दुनिया के 56 देशों में बिना किसी पूर्व वीजा के प्रवेश कर सकते हैं। इन देशों में या तो पूरी तरह से वीजा-मुक्त प्रवेश की अनुमति है या वहां पहुंचने पर वीजा-ऑन-अराइवल (Visa-on-arrival) की सुविधा प्रदान की जाती है।

रैंकिंग में सुधार और वर्तमान स्थिति

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की रैंकिंग में आया यह उछाल पिछले कुछ वर्षों के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है और 75वें स्थान पर पहुंचने के साथ ही भारत ने अपनी वैश्विक गतिशीलता (Global Mobility) में विस्तार किया है। हालांकि, ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वर्ष 2006 में रहा था, जब देश 71वें स्थान पर काबिज था। वर्तमान में 75वीं रैंक यह दर्शाती है कि भारत धीरे-धीरे अपनी पुरानी स्थिति की ओर लौट रहा है। इस रैंकिंग में सुधार का सीधा अर्थ यह है कि भारतीय यात्रियों को अब 56 देशों की यात्रा के लिए दूतावासों के चक्कर काटने या लंबी वीजा प्रक्रियाओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुविधा पर्यटन और व्यापारिक यात्राओं को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रही है।

वीजा-मुक्त और वीजा-ऑन-अराइवल वाले प्रमुख देश

भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए उपलब्ध 56 देशों की सूची में एशिया, अफ्रीका, कैरिबियन और ओशिनिया क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण राष्ट्र शामिल हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों ने भारतीय यात्रियों के लिए अपनी वीजा नीतियों में ढील दी है। इसके अतिरिक्त, भूटान और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भारतीयों को पहले से ही वीजा-मुक्त प्रवेश की सुविधा प्राप्त है। हिंद महासागर क्षेत्र में मॉरीशस और मालदीव जैसे देश भी इस सूची का हिस्सा हैं। अफ्रीकी महाद्वीप में केन्या, तंजानिया और सेशेल्स जैसे देश भारतीय नागरिकों को वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्रदान करते हैं। कैरिबियन क्षेत्र में बारबाडोस, जमैका और ग्रेनाडा जैसे देशों में भी भारतीय बिना पूर्व वीजा के जा सकते हैं और ओशिनिया क्षेत्र में फिजी और कुक आइलैंड्स जैसे देश इस सूची में शामिल हैं।

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स की कार्यप्रणाली

हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के सभी पासपोर्टों की मूल रैंकिंग है, जो यह निर्धारित करती है कि उनके धारक कितने गंतव्यों तक बिना पूर्व वीजा के पहुंच सकते हैं। यह इंडेक्स 199 विभिन्न पासपोर्टों और 227 अलग-अलग यात्रा गंतव्यों को कवर करता है। इसकी रैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) के डेटा पर आधारित है, जो वैश्विक यात्रा सूचनाओं का सबसे बड़ा और सटीक डेटाबेस बनाए रखता है। प्रत्येक यात्रा गंतव्य के लिए, यदि उस पासपोर्ट धारक को वीजा की आवश्यकता नहीं है, तो उस पासपोर्ट के लिए 1 का स्कोर दिया जाता है। इसमें वीजा-ऑन-अराइवल, विजिटर परमिट या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉरिटी (ETA) भी शामिल हैं। इसके विपरीत, यदि यात्रा से पहले सरकारी मंजूरी या वीजा की आवश्यकता होती है, तो स्कोर 0 दिया जाता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और वैश्विक तुलना

भारत की पासपोर्ट रैंकिंग का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2006 में 71वें स्थान के बाद, भारत की रैंकिंग में कई बार गिरावट देखी गई। पिछले कुछ वर्षों में यह 80 से 87 के बीच बनी हुई थी। इस वर्ष 75वें स्थान पर आना एक महत्वपूर्ण प्रगति है। वैश्विक स्तर पर तुलना की जाए तो सिंगापुर और जापान जैसे देश अक्सर शीर्ष पर बने रहते हैं, जिनके नागरिक 190 से अधिक देशों में वीजा-मुक्त यात्रा कर सकते हैं। भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका की रैंकिंग भारत से काफी नीचे है। भारत की रैंकिंग में सुधार का एक मुख्य कारण विभिन्न देशों के साथ किए गए द्विपक्षीय समझौते और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रा और कूटनीतिक प्रभाव

पासपोर्ट की शक्ति सीधे तौर पर किसी देश के कूटनीतिक संबंधों और उसकी आर्थिक स्थिरता से जुड़ी होती है। अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार लगातार अन्य देशों के साथ वीजा छूट समझौतों पर बातचीत कर रही है। हाल के महीनों में कई देशों ने भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अस्थायी रूप से वीजा-मुक्त प्रवेश की घोषणा की है। यह न केवल पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों की साख को भी बढ़ाता है। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव बढ़ रहा है, कई देश भारतीय यात्रियों के लिए अपनी सीमाओं को आसान बना रहे हैं। यह रैंकिंग सुधार इसी वैश्विक बदलाव का एक हिस्सा है, जिससे भारतीय पासपोर्ट की स्वीकार्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हुई है।

विज्ञापन