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पीएम मोदी ने दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया

पीएम मोदी ने दिल्ली में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को नई दिल्ली में नवनिर्मित 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन 1 और 2' का उद्घाटन किया। ये इमारतें अब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और विभिन्न महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों के नए प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करेंगी। उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने इस अवसर को भारतीय इतिहास के एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उनके अनुसार, यह कदम औपनिवेशिक काल के प्रतीकों को पीछे छोड़कर एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में बढ़ने का प्रतीक है।

गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का अभियान

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पुरानी इमारतें, विशेष रूप से नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक, ब्रिटिश साम्राज्य की विरासत थीं और उनके अनुसार, इन इमारतों का निर्माण ब्रिटिश शासन को मजबूत करने और देश को लंबे समय तक अधीन रखने के उद्देश्य से किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन' का निर्माण इस मानसिकता को बदलने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने पहले भी कई प्रतीकात्मक बदलाव किए हैं, जैसे रेसकोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग करना और नेशनल वॉर मेमोरियल व पुलिस स्मारक का निर्माण करना। अधिकारियों के अनुसार, ये परिवर्तन केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शासन के मिजाज को 'हुकूमत' से 'सेवा' में बदलने का एक प्रयास है।

आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता

प्रधानमंत्री ने पुरानी इमारतों की सीमाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लगभग 100 साल पुरानी ये इमारतें अब जर्जर हो रही थीं। अधिकारियों के अनुसार, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में आधुनिक तकनीक को फिट करना एक बड़ी चुनौती थी और वहां जगह की भी भारी कमी थी। नई इमारतों, 'सेवा तीर्थ' और 'कर्तव्य भवन' को 21वीं सदी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन नए परिसरों से सरकार के परिचालन खर्च में कमी आएगी और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों में ही नहीं, बल्कि कार्यस्थलों और बुनियादी ढांचे में भी दिखाई देनी चाहिए।

नए परिसरों में स्थित कार्यालय और मंत्रालय

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 'सेवा तीर्थ' परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित होंगे। वहीं, 'कर्तव्य भवन 1 और 2' में देश के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों को जगह दी गई है। इनमें वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कानून और न्याय, सूचना और प्रसारण, कृषि और किसान कल्याण, रसायन और उर्वरक, तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय भी इन्हीं परिसरों से संचालित होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां से लिए जाने वाले निर्णय किसी शासक की सोच के बजाय 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने का आधार बनेंगे।

विजया एकादशी और विकसित भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री ने उद्घाटन के लिए 13 फरवरी के दिन और विजया एकादशी के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार विजया एकादशी पर लिया गया संकल्प निश्चित रूप से विजय की ओर ले जाता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज पूरा देश 'विकसित भारत' का संकल्प लेकर इन नए भवनों में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये नए कार्यस्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे और देश की विकास यात्रा को नई गति प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री ने इन इमारतों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि यह अमृत काल की भावना का प्रतिबिंब है, जहां शासन का एकमात्र उद्देश्य जनसेवा है।

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