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: ताश के पत्तों की तरह ढहा रुपया: डॉलर के मुकाबले 95.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा

- ताश के पत्तों की तरह ढहा रुपया: डॉलर के मुकाबले 95.81 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
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भारतीय मुद्रा बाजार में इस सप्ताह जबरदस्त हलचल देखी गई क्योंकि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ताश के पत्तों की तरह ढह गया। 30 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो रुपये को हर रोज औसतन 46 पैसे का नुकसान हुआ है। 81 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर जाकर थमा। मुद्रा बाजार में एक ही हफ्ते के भीतर इतनी बड़ी गिरावट विरले ही देखने को मिलती है, जिसने निवेशकों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है।

रिकॉर्ड निचले स्तर और इंट्राडे उतार-चढ़ाव

शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान रुपया एक समय 96 के स्तर को भी पार कर गया था। 14 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया, जो पिछले बंद भाव से 50 पैसे की गिरावट को दर्शाता है। 81 पर स्थिर हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप ने रुपये को और अधिक गिरने से बचाने में मदद की। 64 पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपये में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

वैश्विक कारक और आर्थिक दबाव

रुपये पर दबाव के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। पिछले छह ट्रेडिंग सत्रों में, ईरान युद्ध के जोखिम बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जाने के कारण रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। 34 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में भारी कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं और फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं, भारतीय बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन और एआई-आधारित निवेश के अवसरों की कमी ने पूंजी प्रवाह पर दबाव डाला है। इसके अलावा, कम शुद्ध एफडीआई प्रवाह से भुगतान संतुलन पर दबाव पड़ने की संभावना है, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रही हैं।

बाजार के आंकड़े और व्यापार घाटा

रुपये की कमजोरी का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा। 50 पर आ गया। 04 USD प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। 67 अरब डॉलर था। 94 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

क्या रुपया लगाएगा शतक?

करेंसी मार्केट के एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, आने वाले दिनों में रुपये में और गिरावट देखी जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि साल के अंत तक रुपया 100 के स्तर को छू सकता है। बॉन्ड मार्केट में भारी बिकवाली रुपये के लिए एक नकारात्मक संकेत है। ईरान का मसला लंबा चलने की संभावना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहेगी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी जारी रह सकती है। वहीं, मीराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई की चिंताओं के चलते रुपये में गिरावट का रुख बना रहेगा। हालांकि, आरबीआई के हस्तक्षेप और सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने जैसे कदमों से निचले स्तरों पर रुपये को सहारा मिल सकता है। 20 की रेंज में कारोबार कर सकता है।

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