भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आगामी कारोबारी सत्रों में घरेलू व्यापक आर्थिक आंकड़े, मासिक वायदा और विकल्प (F&O) एक्सपायरी और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल निर्धारित करेंगे। विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को लेकर लिए गए फैसलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय इक्विटी बाजार पर पड़ने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ट्रेडिंग गतिविधियां और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर साबित होंगे।
घरेलू आर्थिक आंकड़े और एफएंडओ एक्सपायरी
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजीत मिश्रा के अनुसार, 24 फरवरी को होने वाली मासिक एफएंडओ एक्सपायरी के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, निवेशक आगामी सप्ताह में जारी होने वाले सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। बुनियादी ढांचा उत्पादन (Infrastructure Output) के साल-दर-साल आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेगी। सरकारी बजट के बाद के घटनाक्रम और राजकोषीय संकेतकों का भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान रहने वाला है और अधिकारियों के अनुसार, इन आंकड़ों से भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य की विकास दर का संकेत मिलेगा।
अमेरिकी टैरिफ और कानूनी घटनाक्रम का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकारी आदेशों ने व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ा दी है और ट्रंप ने हाल ही में भारत सहित कई देशों पर 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15% कर दिया गया। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए इन व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिया है। अदालत के अनुसार, राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह कदम उठाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानूनी घटनाक्रम और ट्रंप प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया का वैश्विक जोखिम भावनाओं पर गहरा असर पड़ेगा, जिससे भारतीय बाजार भी अछूता नहीं रहेगा।
वैश्विक भू-राजनीति और कच्चे तेल की कीमतें
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, वैश्विक बाजार की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिकी हुई है और मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार की अस्थिरता कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को सीधे प्रभावित करती है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए एक संवेदनशील कारक है। इसके अलावा, वैश्विक मौद्रिक संकेत और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के रुख पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। भारत की आगामी जीडीपी रिपोर्ट न केवल आर्थिक स्वास्थ्य का पैमाना होगी, बल्कि यह कॉर्पोरेट आय की संभावनाओं और बाजार के दीर्घकालिक रुझान को भी स्पष्ट करेगी।
पिछले सप्ताह का बाजार प्रदर्शन और क्षेत्रीय रुझान
पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में मामूली बढ़त दर्ज की गई। 39% की तेजी देखी गई। बाजार की धारणा सावधानी और आशावाद के बीच बनी रही और बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बिजली और चुनिंदा एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्रों में मजबूत खरीदारी ने वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने में मदद की। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र के शेयरों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े व्यवधानों और मार्जिन दबाव का असर देखा गया। लार्जकैप शेयरों में स्थिरता ने बाजार को सकारात्मक दायरे में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाजार की भविष्य की स्थिति और तरलता प्रवाह
विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में बाजार एक सीमित दायरे (range-bound) में कारोबार कर सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक तरलता प्रवाह (Liquidity Flow) और वैश्विक जोखिमों के प्रति निवेशकों के नजरिए पर निर्भर करेगी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली या खरीदारी की गति बाजार के तकनीकी स्तरों को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक व्यापार नीतियों और भू-राजनीतिक स्थितियों में स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। घरेलू मोर्चे पर कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर समाप्त होने के बाद अब ध्यान पूरी तरह से व्यापक आर्थिक संकेतकों और वैश्विक समाचारों पर केंद्रित हो गया है।