रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम में आयोजित एक औपचारिक समारोह में स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना को सौंप दिया है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। आईएनएस तारागिरी का निर्माण स्वदेशी तकनीक के आधार पर किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को प्रदर्शित करता है। 6670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जो इसे दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम बनाती है। अधिकारियों के अनुसार, इस युद्धपोत के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई है।
आईएनएस तारागिरी के निर्माण में लगभग 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है। यह जहाज ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और उन्नत पनडुब्बी रोधी हथियारों से सुसज्जित है और वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और हिंद महासागर में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए, भारतीय नौसेना के बेड़े में इस तरह के आधुनिक फ्रिगेट का शामिल होना सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह युद्धपोत न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक अभियानों में भी समान रूप से सक्षम है।
भारतीय नौसेना की वर्तमान क्षमता और युद्धपोतों की संख्या
भारतीय नौसेना के पास वर्तमान में 130 से अधिक युद्धपोत और पनडुब्बियां सक्रिय सेवा में हैं। इस बेड़े में विमानवाहक पोत, विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर), फ्रिगेट, कोरवेट और विभिन्न श्रेणियों की पनडुब्बियां शामिल हैं। नौसेना की संरचना में विविधता इसे विभिन्न प्रकार के समुद्री खतरों से निपटने में सक्षम बनाती है। बेड़े में आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत जैसे दो प्रमुख विमानवाहक पोत शामिल हैं, जो समुद्र में भारत की हवाई शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 12 विध्वंसक और 15 से अधिक फ्रिगेट नौसेना की अग्रिम पंक्ति की रक्षा करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, नौसेना का लक्ष्य 2030 तक अपने बेड़े को 170 से अधिक जहाजों तक ले जाने का है।
आईएनएस विक्रांत: भारत का सबसे शक्तिशाली विमानवाहक पोत
भारतीय नौसेना के बेड़े में आईएनएस विक्रांत को सबसे शक्तिशाली युद्धपोत माना जाता है। यह भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है, जिसका वजन 45,000 टन से अधिक है। आईएनएस विक्रांत एक तैरते हुए हवाई अड्डे की तरह कार्य करता है, जिस पर मिग-29के जैसे लड़ाकू विमान और विभिन्न प्रकार के हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। इसकी लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर है, जो इसे विशाल समुद्री अभियानों के लिए उपयुक्त बनाती है। यह जहाज अत्याधुनिक रडार प्रणालियों और रक्षात्मक मिसाइल प्रणालियों से लैस है, जो इसे लंबी दूरी के ऑपरेशनों में अत्यधिक प्रभावी बनाते हैं। यह हिंद महासागर में भारत की शक्ति प्रदर्शन का मुख्य केंद्र है।
ब्रह्मोस मिसाइल और युद्धपोतों की मारक क्षमता
भारतीय युद्धपोतों की मारक क्षमता का मुख्य आधार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। यह मिसाइल दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है, जिसकी गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है। ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर से 400 किलोमीटर तक है और यह अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम है। आईएनएस तारागिरी और आईएनएस विशाखापट्टनम जैसे आधुनिक जहाजों पर इस मिसाइल की तैनाती से नौसेना की आक्रामक शक्ति कई गुना बढ़ गई है और यह मिसाइल समुद्र से समुद्र और समुद्र से जमीन पर हमला करने की दोहरी क्षमता रखती है, जो इसे एक घातक हथियार बनाती है।
प्रोजेक्ट 17ए और स्टील्थ तकनीक का महत्व
आईएनएस तारागिरी 'प्रोजेक्ट 17ए' के तहत विकसित किया गया एक आधुनिक फ्रिगेट है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य उन्नत स्टील्थ विशेषताओं वाले युद्धपोतों का निर्माण करना है। स्टील्थ तकनीक जहाज के डिजाइन और सामग्री के माध्यम से उसके रडार सिग्नेचर को कम करती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है। प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे जहाजों में बेहतर उत्तरजीविता, उन्नत हथियार प्रणालियां और सेंसर लगे हैं। ये जहाज पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किए जा रहे हैं, जो घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने में सहायक हैं। इसमें एकीकृत निर्माण पद्धति का उपयोग किया गया है, जिससे निर्माण समय में कमी आई है।
वैश्विक नौसैनिक शक्तियों के बीच भारत का स्थान
दुनिया भर की नौसैनिक शक्तियों की तुलना में भारत एक प्रमुख स्थान रखता है। चीन के पास वर्तमान में 350 से अधिक युद्धपोतों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक बेड़ा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के पास लगभग 290 से 300 युद्धपोत हैं, लेकिन उसकी तकनीकी श्रेष्ठता और 11 विमानवाहक पोतों का बेड़ा उसे सबसे शक्तिशाली बनाता है। रूस के पास लगभग 250 नौसैनिक प्लेटफॉर्म हैं, जिनमें परमाणु पनडुब्बियों की प्रधानता है। भारत 130 से अधिक जहाजों के साथ शीर्ष 10 नौसैनिक शक्तियों में शामिल है। भारतीय नौसेना का ध्यान केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और स्वदेशीकरण के माध्यम से मारक क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।