आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को उपनेता (डिप्टी लीडर) के पद से हटा दिया है। पार्टी ने उनके स्थान पर सांसद अशोक मित्तल को इस जिम्मेदारी के लिए नामित किया है। इस संगठनात्मक फेरबदल के बाद राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पार्टी नेतृत्व उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है क्योंकि वह सदन में आम जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दे उठा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में बोलने का अधिकार छीनना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार है।
राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया और गंभीर आरोप
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए 2 मिनट 18 सेकेंड के वीडियो में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा में लगातार मध्यम वर्ग और आम आदमी की समस्याओं को मुखरता से उठा रहे थे और चड्ढा के अनुसार, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि उन्हें आवंटित बोलने का समय अब अशोक मित्तल को दिया जाए। उन्होंने इसे अपनी आवाज को खामोश करने की एक सोची-समझी कोशिश करार दिया। चड्ढा ने वीडियो में कहा कि वह खामोश जरूर किए गए हैं, लेकिन हारे नहीं हैं। उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए भविष्य में वापसी का संकेत दिया है।
राज्यसभा सचिवालय को भेजी गई आधिकारिक चिट्ठी
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है और इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राघव चड्ढा के स्थान पर अब अशोक मित्तल सदन में पार्टी के उपनेता होंगे। पार्टी ने सचिवालय से आग्रह किया है कि कार्यसूची और चर्चाओं के दौरान पार्टी के कोटे का जो समय पहले राघव चड्ढा को आवंटित किया जाता था, वह अब अशोक मित्तल को दिया जाए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह एक नियमित प्रक्रिया है और नेतृत्व में बदलाव संगठन की आंतरिक रणनीतियों का हिस्सा है और इससे पहले एनडी गुप्ता इस पद पर कार्यरत थे, जिनके बाद राघव चड्ढा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सदन में उठाए गए जनहित के मुद्दे
अपने कार्यकाल के दौरान राघव चड्ढा ने राज्यसभा में कई ऐसे मुद्दे उठाए जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मोबाइल डेटा की कीमतों में वृद्धि, मध्यम वर्ग पर करों का बोझ, हवाई अड्डों पर खाद्य पदार्थों की अत्यधिक कीमतें और डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की कार्य स्थितियों जैसे विषयों पर सरकार को घेरा था। चड्ढा का दावा है कि इन मुद्दों को उठाने से जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ी थी और कई समस्याओं का समाधान भी हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि जनहित के इन कार्यों से पार्टी को क्या आपत्ति हो सकती है कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है।
पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन का संदर्भ
आम आदमी पार्टी के भीतर इस बदलाव को लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर पार्टी इसे एक प्रशासनिक और रूटीन फेरबदल बता रही है। हालांकि, राघव चड्ढा के बयानों ने आंतरिक मतभेदों की ओर संकेत किया है। अशोक मित्तल, जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं, अब सदन में पार्टी की रणनीति और पक्ष रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पार्टी आगामी विधायी सत्रों के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रही है। सचिवालय को दिए गए निर्देश के बाद अब सदन की कार्यवाही के दौरान पार्टी के समय का प्रबंधन नए उपनेता के अधीन होगा।