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AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल नियुक्त

AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा उपनेता पद से हटाया, अशोक मित्तल नियुक्त
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आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से मुक्त कर दिया है। पार्टी नेतृत्व ने उनकी जगह जालंधर से सांसद अशोक मित्तल को इस पद पर नियुक्त किया है और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने इस संबंध में राज्यसभा सचिवालय को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भविष्य में सदन की कार्यवाही के दौरान राघव चड्ढा को पार्टी की ओर से बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा वर्ष 2022 से पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद हैं और उनका वर्तमान कार्यकाल वर्ष 2028 तक निर्धारित है।

अशोक मित्तल की नई भूमिका और पृष्ठभूमि

राघव चड्ढा का स्थान लेने वाले अशोक मित्तल भी पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। मित्तल जालंधर के निवासी हैं और शिक्षा जगत के साथ-साथ व्यावसायिक क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वह पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक और चांसलर हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले मित्तल एक सफल व्यवसायी के रूप में जाने जाते थे और उनका परिवार 'लवली ग्रुप' का संचालन करता है, जिसका विस्तार ऑटोमोबाइल सेक्टर और प्रसिद्ध 'लवली स्वीट्स' के माध्यम से मिठाई व्यवसाय तक है। अशोक मित्तल वर्ष 2022 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और अब उन्हें सदन में पार्टी के उपनेता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

पार्टी के निर्णय और चड्ढा की हालिया गतिविधियां

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को पद से हटाने के कारणों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है और हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय है कि चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी की मुख्यधारा की गतिविधियों और महत्वपूर्ण बयानों से दूरी बनाए हुए थे। विशेष रूप से, 27 फरवरी को जब दिल्ली की एक निचली अदालत ने शराब नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राहत प्रदान की थी, तब भी राघव चड्ढा की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया था। पार्टी के इस कदम को उनके इसी व्यवहार और कथित दूरी से जोड़कर देखा जा रहा है।

शीतकालीन सत्र 2025 में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

संसद के पिछले सत्रों के दौरान राघव चड्ढा ने कई जनहित के मुद्दों को सदन के पटल पर रखा था। शीतकालीन सत्र 2025 में उन्होंने गिग वर्कर्स की कार्य स्थितियों पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स के डिलीवरी पार्टनर्स के कम वेतन, 10-मिनट डिलीवरी मॉडल के जोखिमों और उनकी सामाजिक सुरक्षा के अभाव का मुद्दा उठाया था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के हितों की रक्षा के लिए कॉपीराइट एक्ट 1957 में संशोधन की मांग की थी, ताकि एल्गोरिदम और गलत 'टेकडाउन' से शिक्षकों और इन्फ्लुएंसर्स को बचाया जा सके। स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्होंने 'एक देश, एक स्वास्थ्य उपचार' की अवधारणा का समर्थन किया था।

बजट सत्र 2026 में जनहित के प्रस्ताव

बजट सत्र 2026 के दौरान भी राघव चड्ढा ने उपभोक्ताओं और आम नागरिकों से जुड़े कई तकनीकी और आर्थिक मुद्दे उठाए थे। उन्होंने मोबाइल रीचार्ज की अवधि को 28 दिन के बजाय पूरे कैलेंडर महीने (30 या 31 दिन) करने का प्रस्ताव दिया था, साथ ही बचे हुए डेटा को अगले महीने में जोड़ने (Data Rollover) की वकालत की थी। बैंकिंग क्षेत्र में उन्होंने न्यूनतम शेष राशि (Minimum Balance) न रखने पर लगने वाले जुर्माने को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की थी। इसके अलावा, उन्होंने हवाई अड्डों पर किफायती भोजन के लिए 'किफायती कैफे' की स्थापना, विवाहित जोड़ों के लिए संयुक्त आयकर फाइलिंग का विकल्प और भारत में पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को कानूनी अधिकार बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव सदन में प्रस्तुत किए थे।

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