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इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका तनाव पर दो दिवसीय वार्ता, कई देश शामिल

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका तनाव पर दो दिवसीय वार्ता, कई देश शामिल
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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के उद्देश्य से दो दिवसीय उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की जा रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पहल पर शुरू हुई इस कूटनीतिक कवायद में मध्य पूर्व के कई प्रमुख देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के कारण वैश्विक सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाना और क्षेत्र में जारी शत्रुता को समाप्त करना है।

मध्यस्थता वार्ता में शामिल होने वाले प्रमुख देश

एएफपी (AFP) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने इस वार्ता के लिए सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के शीर्ष राजनयिकों को आमंत्रित किया है। ये राजनयिक रविवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे ताकि संघर्ष विराम की संभावनाओं पर चर्चा की जा सके। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों की भागीदारी से इस वार्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक वजन मिलेगा। इन देशों के विदेश मंत्रियों के बीच रविवार और सोमवार को गहन चर्चा होने की संभावना है, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जाएगी।

अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधित्व की स्थिति

वार्ता में अमेरिका और ईरान के सीधे प्रतिनिधित्व को लेकर अभी भी कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी अटकलें हैं कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। हालांकि, तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी विशेष दूतों के साथ सीधी बातचीत को लेकर संशय में है। ईरान ने पूर्व में हुई वार्ताओं की विफलता और गहरे अविश्वास को इसका कारण बताया है और पाकिस्तान सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि ईरान की ओर से कौन सा वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में शामिल होगा, लेकिन इस्लामाबाद के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान जारी रहने की पुष्टि की गई है।

पाकिस्तान की कूटनीतिक पहल और उद्देश्य

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ फोन पर विस्तृत चर्चा की है। शरीफ का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पाकिस्तान इस मामले में एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है और ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के इन प्रयासों की सराहना की है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की मांगों को विरोधाभासी बताते हुए संदेह व्यक्त किया है। पाकिस्तान का लक्ष्य दोनों पक्षों को एक साझा मंच पर लाना है ताकि सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान निकाला जा सके।

विफल पूर्व वार्ताएं और वर्तमान प्रस्ताव

इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुए कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं रहे थे। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान को 15-सूत्रीय कार्य-सूची सौंपी थी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं और जलमार्ग खोलने की शर्तें शामिल थीं। इसके जवाब में ईरान ने अपनी 5-सूत्रीय योजना पेश की थी, जिसमें हर्जाने की मांग और सामरिक जलमार्गों पर संप्रभुता की मान्यता पर जोर दिया गया था। इस्लामाबाद वार्ता में इन पुराने प्रस्तावों पर फिर से विचार किए जाने और नए संशोधनों के साथ समझौता करने की कोशिश की जाएगी। तेहरान ने अभी तक वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है, लेकिन पाकिस्तान के माध्यम से जवाब भेजा है।

क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव और चुनौतियां

राजनयिक प्रयासों के बीच जमीन पर सैन्य तनाव कम नहीं हुआ है। लगभग 3,500 मरीन और नौसैनिकों के साथ अमेरिकी नौसैनिक जहाज इस क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी मौजूदगी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि विदेशी सैन्य उपस्थिति क्षेत्र के लिए खतरा है। इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता इन बढ़ते सैन्य खतरों के बीच शांति की एक कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

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