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पीएम मोदी: मिडिल ईस्ट संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक

पीएम मोदी: मिडिल ईस्ट संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाम 6:30 बजे आयोजित की जाएगी। इस संवाद का मुख्य केंद्र मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी तनावपूर्ण स्थिति और भारत पर इसके संभावित प्रभावों की समीक्षा करना है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे जहां वर्तमान में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है और आदर्श आचार संहिता लागू है।

मिडिल ईस्ट में जारी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार लगातार सक्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर पहले ही संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के नेताओं के साथ संपर्क में हैं। सरकार का उद्देश्य इस संकट की घड़ी में 'टीम इंडिया' की भावना के साथ राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है और चुनावी राज्यों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, जिसके तहत वहां के मुख्य सचिवों के लिए कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी।

बैठक की रूपरेखा और सहभागिता का विवरण

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह बैठक शुक्रवार शाम को निर्धारित है। इसमें मुख्य रूप से उन राज्यों की तैयारियों पर चर्चा होगी जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र हैं। आचार संहिता की बाधाओं के कारण चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस चर्चा से बाहर रखा गया है, ताकि संवैधानिक मर्यादा बनी रहे। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री राज्यों को वैश्विक परिस्थितियों से अवगत कराएंगे और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करेंगे। सरकार का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संकट के समय राज्यों की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी अत्यंत आवश्यक है।

आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियां

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि मिडिल ईस्ट का संकट भारत के लिए तीन प्रमुख स्तरों पर चुनौतियां लेकर आया है: आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय। भारत अपनी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। इसके अतिरिक्त, खाड़ी के देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं और वहां कार्यरत हैं। उनकी सुरक्षा और हितों की रक्षा करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होने वाली आवाजाही में आ रही बाधाओं ने वैश्विक व्यापार और भारत की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।

रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और आपूर्ति की स्थिति

ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुरक्षित है, जो किसी भी आपात स्थिति में काम आ सकता है। इसके अलावा, फर्टिलाइजर (उर्वरक) की आपूर्ति पर भी वैश्विक असर पड़ रहा है, लेकिन भारत ने पहले ही उर्वरकों का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित कर लिया है और सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर देश के किसानों और आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों पर न पड़े।

कूटनीतिक प्रयास और सर्वदलीय बैठक का संदर्भ

भारत सरकार इस संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी इजराइल, ईरान, अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं और भारत ने हमेशा शांति और संवाद को ही एकमात्र रास्ता बताया है। इसी क्रम में, केंद्र सरकार ने गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस बैठक में विपक्षी दलों को आश्वस्त किया गया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और भारतीय जहाज सुरक्षित मार्गों से गुजर रहे हैं और सरकार ने स्पष्ट किया है कि पैनिक की कोई आवश्यकता नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

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