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राज्यसभा में CAPF विधेयक पर हंगामा: विपक्ष के विरोध के बाद टला

राज्यसभा में CAPF विधेयक पर हंगामा: विपक्ष के विरोध के बाद टला
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संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में सोमवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक पेश किए जाने के दौरान भारी हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के कड़े विरोध और सदन से वॉकआउट के कारण सरकार को इस विधेयक को पेश करने का निर्णय फिलहाल टालना पड़ा है। विपक्षी पार्टियों ने मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक खामियों और विधेयक के प्रावधानों में आईपीएस अधिकारियों के वर्चस्व को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए विपक्षी नेताओं के साथ संवाद शुरू किया है।

विपक्षी दलों का विरोध और प्रक्रियात्मक आपत्तियां

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओब्रायन ने सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि संसदीय नियमों के अनुसार, किसी भी विधेयक को पेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले उसकी प्रतियां सांसदों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने इस नियम का पालन नहीं किया और जल्दबाजी में कानून बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी इस रुख का समर्थन किया और सदन से बाहर चले गए। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून पर बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के आगे बढ़ना उचित नहीं है।

विधेयक के मुख्य प्रावधान और एकीकरण का प्रस्ताव

प्रस्तावित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक का मुख्य उद्देश्य पांच प्रमुख केंद्रीय सुरक्षा बलों के प्रशासनिक ढांचे को एक समान बनाना है। इसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) शामिल हैं। सरकार का प्रस्ताव है कि इन सभी बलों में भर्ती, पदोन्नति और पोस्टिंग की प्रक्रियाओं को एक ही ढांचे के तहत लाया जाए। वर्तमान में, इन बलों के अपने अलग-अलग नियम और प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं, जिन्हें यह विधेयक एकीकृत करने का प्रयास करता है।

आईपीएस प्रतिनियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ

विधेयक के विरोध का एक बड़ा कारण इसमें आईपीएस (IPS) अधिकारियों की तैनाती से जुड़े प्रावधान हैं। यह विवाद पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद और गहरा गया है। अदालत ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने पिछले आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में निर्देश दिया था कि CAPF में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को कम किया जाए और छह महीने के भीतर कैडर रिव्यू पूरा किया जाए। हालांकि, वर्तमान विधेयक में उच्च पदों पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति बढ़ाने का प्रावधान शामिल है, जिसे कैडर अधिकारियों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है।

सरकार की पहल और समन्वय की कोशिशें

सदन में हुए हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बाद सरकार ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए विधेयक को पेश करने की प्रक्रिया रोक दी। एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, सरकार उन मतभेदों को सुलझाना चाहती है जो विपक्षी दलों ने उठाए हैं। इसके तुरंत बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी सांसदों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी उपस्थित थे। दूसरी ओर, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं जैसे जयराम रमेश, जॉन ब्रिटास और सुप्रिया सुले के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। सरकार अब विपक्ष को विश्वास में लेकर विधेयक को दोबारा पेश करने की योजना बना रही है।

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