प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 2 बजे लोकसभा में मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की वर्तमान स्थिति पर महत्वपूर्ण वक्तव्य देंगे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आलाकमान ने अपने सभी सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस संबोधन के माध्यम से मिडिल ईस्ट में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर भारत के आधिकारिक रुख को स्पष्ट करेंगे। इस भाषण में भारत की कूटनीतिक भागीदारी, क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं और वैश्विक ऊर्जा एवं व्यापार मार्गों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है जब मिडिल ईस्ट में सैन्य संघर्ष के कारण तनाव चरम पर है। होर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) सहित कई महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में व्यवधान की खबरें आ रही हैं। भारत सरकार इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों और वहां मौजूद भारतीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर निरंतर निगरानी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री अपने भाषण में खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए चलाए जा रहे बचाव अभियानों की प्रगति पर भी सदन को सूचित कर सकते हैं।
मिडिल ईस्ट संकट और भारत की कूटनीतिक रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का मुख्य केंद्र मिडिल ईस्ट में भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति रहने की उम्मीद है। भारत के लिए यह क्षेत्र न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि लाखों प्रवासी भारतीयों का घर भी है। अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री इस बात पर जोर दे सकते हैं कि भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इस दौरान भारत की 'एक्ट वेस्ट' नीति और क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंधों पर भी प्रकाश डाला जा सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर समीक्षा
सदन में संबोधन से पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। 30 घंटे तक चली इस बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि देश में किसी भी स्थिति में जमाखोरी और कालाबाजारी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने आपूर्ति श्रृंखला, वितरण और लॉजिस्टिक्स को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं ताकि वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर न पड़े।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और निकासी अभियान
खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। वर्तमान में भारत सरकार विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों से भारतीयों को निकालने के लिए विशेष अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री अपने भाषण में इन अभियानों की वर्तमान स्थिति और अब तक सुरक्षित वापस लाए गए नागरिकों के आंकड़ों को साझा कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है और संकटग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले भारतीयों के लिए निरंतर परामर्श जारी किए जा रहे हैं।
विपक्ष की मांग और संसाधन उपलब्धता पर स्पष्टीकरण
28 फरवरी से अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद से ही विपक्षी दल संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस की मांग कर रहे हैं। विपक्ष ने देश में गैस, तेल और ऊर्जा संसाधनों की संभावित कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि देश के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। प्रधानमंत्री मोदी आज अपने भाषण के दौरान इन चिंताओं को संबोधित कर सकते हैं और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा किए गए प्रबंधों का विवरण दे सकते हैं।
विधायी कार्य: कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026
लोकसभा की आज की कार्यवाही में केवल प्रधानमंत्री का संबोधन ही नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी शामिल हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सदन में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश करेंगी। इस विधेयक के माध्यम से लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) एक्ट 2008 और कंपनी एक्ट 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है। इससे पहले, सत्र की पिछली कार्यवाही के दौरान विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को 'गिलोटिन' प्रक्रिया के माध्यम से बिना चर्चा के पारित कर दिया गया था, जिसके बाद अब विधायी एजेंडे पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।