लोकसभा में बुधवार को एक ऐतिहासिक विधायी घटनाक्रम के तहत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के पारंपरिक समापन भाषण के पारित कर दिया गया। संसदीय इतिहास में वर्ष 2004 के बाद यह पहला अवसर है जब प्रधानमंत्री के संबोधन के बिना ही इस प्रस्ताव को सदन की स्वीकृति मिली है। विपक्षी दलों के निरंतर हंगामे और विभिन्न मुद्दों पर गतिरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही, जिसके परिणामस्वरूप यह निर्णय लिया गया।
संसदीय इतिहास और 2004 का संदर्भ
संसदीय परंपराओं के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के बाद प्रधानमंत्री का उत्तर देना एक मानक प्रक्रिया है। हालांकि, 10 जून 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी। उस समय विपक्ष ने प्रधानमंत्री को बोलने की अनुमति नहीं दी थी, जिसके कारण बिना भाषण के ही प्रस्ताव पारित करना पड़ा था। ठीक दो दशक बाद, वर्तमान सत्र में भी विपक्ष के कड़े रुख के कारण इतिहास दोहराया गया है।
विपक्षी हंगामा और सदन की कार्यवाही
बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा की शुरुआत होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर नारेबाजी शुरू कर दी। एम. नरवणे की पुस्तक के अंशों और भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार सौदे को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। हंगामे की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के बजाय सरकार विधायी कार्यों को जल्दबाजी में निपटा रही है।
राज्यसभा में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी भारी गहमागहमी देखी गई। आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप पाठक ने देश में बच्चों के गायब होने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में हर आठ मिनट में एक बच्चा गायब हो रहा है और दिल्ली इस मामले में एक संवेदनशील केंद्र बन गई है। उन्होंने मानव तस्करी को रोकने के लिए कड़े कानून और त्वरित कार्रवाई की मांग की। वहीं, सदन में राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने से रोकने के मुद्दे पर भी विपक्षी सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष की मांग और भविष्य का रुख
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने स्पष्ट किया कि जब तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक विपक्ष प्रधानमंत्री को बोलने नहीं देगा। उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव को बिना चर्चा और प्रधानमंत्री के भाषण के पारित करने की प्रक्रिया की आलोचना की। विश्लेषकों के अनुसार, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ता यह गतिरोध आगामी बजट चर्चाओं को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, सदन की कार्यवाही बजट पर केंद्रित होने की संभावना है, लेकिन राजनीतिक तनाव बरकरार है।