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लोकसभा अध्यक्ष का दावा: संसद में पीएम मोदी पर हमले की आशंका

लोकसभा अध्यक्ष का दावा: संसद में पीएम मोदी पर हमले की आशंका
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को सदन की कार्यवाही के दौरान एक अत्यंत गंभीर और चौंकाने वाला दावा किया है। अध्यक्ष ने कहा कि बुधवार को संसद के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक 'अप्रिय और अप्रत्याशित घटना' होने की प्रबल आशंका थी। इसी सुरक्षा जोखिम और सदन के भीतर बने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वे सदन में न आएं। इस खुलासे के बाद संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच वाकयुद्ध और गहरा गया है।

सुरक्षा चिंताओं और अप्रत्याशित घटना का दावा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि बुधवार शाम 5 बजे जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देना था, तब स्थितियां सामान्य नहीं थीं। अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें ऐसी सूचनाएं और संकेत मिले थे कि सदन के भीतर प्रधानमंत्री के साथ कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा और प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन की कार्यवाही में शामिल न होने का अनुरोध किया था। अध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा कि सदन में पोस्टर लाना और कार्यवाही में व्यवधान डालना संसदीय मर्यादाओं के विरुद्ध है।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और सरकार पर आरोप

लोकसभा अध्यक्ष के इस दावे पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री 'अध्यक्ष के पीछे छिप रहे हैं'। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है और इसीलिए इस तरह के दावे किए जा रहे हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि सदन में तीन महिलाएं अध्यक्ष के सामने खड़ी थीं और प्रधानमंत्री में सदन में आकर उनका सामना करने की हिम्मत नहीं थी। विपक्ष का तर्क है कि सरकार चर्चा को बाधित करने के लिए सुरक्षा का बहाना बना रही है, जबकि वे केवल जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब चाहते हैं।

सदन की कार्यवाही में गतिरोध और नारेबाजी

बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा था। विपक्ष मणिपुर हिंसा, नीट परीक्षा में अनियमितता और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा था। हंगामे के बीच ही लोकसभा अध्यक्ष ने ध्वनि मत से धन्यवाद प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसे बाद में बिना प्रधानमंत्री के भाषण के ही पारित कर दिया गया और विपक्षी सांसदों का कहना है कि जब तक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा करने का पर्याप्त समय नहीं दिया जाता, वे प्रधानमंत्री को सदन में बोलने नहीं देंगे।

विश्लेषकों के अनुसार संसदीय गतिरोध का प्रभाव

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सुरक्षा खतरे का दावा करना भारतीय संसदीय इतिहास में एक दुर्लभ घटना है। विश्लेषकों का मानना है कि इस दावे ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से मौजूद अविश्वास की खाई को और चौड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार इसे सुरक्षा का गंभीर मामला बता रही है, वहीं दूसरी ओर विश्लेषक इसे संसदीय संवाद के पूरी तरह ठप होने के संकेत के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सदन के भीतर सुरक्षा और व्यवहार के मानकों पर सहमति नहीं बनी, तो आगामी सत्रों में विधायी कार्यों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में संसद के भीतर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का उत्तर देने वाले हैं, लेकिन लोकसभा में हुए घटनाक्रम की छाया वहां भी दिखने की संभावना है। विपक्षी दल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सदन की मर्यादा से समझौता नहीं करेगी। लोकसभा अध्यक्ष के दावों ने सुरक्षा एजेंसियों और संसदीय सुरक्षा दल के लिए भी नई चुनौतियां पेश कर दी हैं, जिससे आने वाले दिनों में सदन के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

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