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राज्यसभा में PM मोदी ने कहा- ट्रेड डील से विश्व खुश, विपक्ष का वॉकआउट

राज्यसभा में PM मोदी ने कहा- ट्रेड डील से विश्व खुश, विपक्ष का वॉकआउट
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति, वैश्विक व्यापार समझौतों और पिछले एक दशक में किए गए नीतिगत सुधारों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है और दूसरा क्वार्टर विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अत्यंत निर्णायक साबित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब एक ऐसे पड़ाव पर पहुंच चुका है जहां से पीछे मुड़कर देखने का कोई विकल्प नहीं है।

वैश्विक व्यापार समझौते और 'मदर ऑफ ऑल डील्स'

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के बड़े देश भारत के साथ व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने जानकारी दी कि भारत ने दुनिया के 9 बड़े देशों के साथ महत्वपूर्ण ट्रेड डील की हैं। इसमें 27 देशों के साथ की गई एक व्यापक डील भी शामिल है, जिसे उन्होंने 'मदर ऑफ ऑल डील्स' करार दिया। पीएम मोदी के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका के साथ होने वाले व्यापारिक समझौतों की पूरी दुनिया सराहना कर रही है। उन्होंने कहा कि जब एक विकसित देश किसी विकासशील देश के साथ ऐसी डील करता है, तो यह भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भरोसे का प्रमाण है।

बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और एनपीए का प्रबंधन

आर्थिक सुधारों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने 2014 से पहले की 'फोन बैंकिंग' संस्कृति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान राजनीतिक रसूख के आधार पर अरबों रुपये के ऋण दिए गए, जिससे बैंकिंग व्यवस्था तबाही की कगार पर पहुंच गई थी और पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने हिम्मत के साथ सुधार किए और कमजोर सरकारी बैंकों का विलय (Merger) किया। उन्होंने दावा किया कि एनपीए (NPA) के पहाड़ों को अब न्यूनतम स्तर पर लाया गया है, जिससे बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है और इसके अतिरिक्त, मुद्रा योजना के तहत युवाओं को ₹30 lakh crore से अधिक का ऋण प्रदान किया गया है, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और एमएसएमई का सुदृढ़ीकरण

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के प्रति धारणा बदलने का श्रेय अपनी सरकार को दिया। उन्होंने कहा कि पहले पीएसयू को बंद होने वाली इकाइयों के रूप में देखा जाता था, लेकिन आज एलआईसी (LIC), एसबीआई (SBI) और एचएएल (HAL) जैसे संस्थान रिकॉर्ड मुनाफा कमा रहे हैं। एमएसएमई (MSME) क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क को मजबूत करने से वैश्विक स्तर पर भारत पर भरोसा बढ़ा है। पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इन संस्थानों के भविष्य पर अफवाहें फैलाते थे, उन्हें आज की प्रगति देखनी चाहिए।

कृषि क्षेत्र और नीति आयोग का नया मॉडल

किसानों के कल्याण पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश के 10 करोड़ छोटे किसानों पर पहले कभी ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से अब तक किसानों के खातों में ₹4 lakh crore सीधे हस्तांतरित किए जा चुके हैं। योजना आयोग को नीति आयोग में बदलने के निर्णय को सही ठहराते हुए उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने भाषण का संदर्भ दिया और उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती 'जीप और खच्चर' वाले मॉडल ने विकास की गति को बाधित किया था, जिसे अब 'प्रगति' जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म और नीति आयोग के विजन से बदला गया है।

विश्लेषकों का दृष्टिकोण और राजनीतिक संदर्भ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह भाषण पूरी तरह से विकास और आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित रहा, जिसका उद्देश्य भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करना था और संबोधन के दौरान विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया, जिस पर पीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग थक कर चले गए हैं, उन्हें जनता को जवाब देना होगा। इससे पहले लोकसभा में हंगामे के कारण पीएम का भाषण नहीं हो सका था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने संसदीय इतिहास में एक 'काले धब्बे' के समान बताया और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का ध्यान अब 2026 तक भारत को आर्थिक विकास के नए चरण में ले जाने पर है।

निष्कर्ष के तौर पर, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत आज 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर सवार है और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले देश के रूप में उभर रहा है। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और भविष्य के लिए तैयार नीतियों (Future Ready Policies) को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।

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