ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के 13वें दिन राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शांति बहाली के लिए अपनी शर्तें स्पष्ट की हैं। रूस और पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद, ईरानी राष्ट्रपति ने तीन मुख्य मांगों को युद्ध विराम का आधार बताया है। यह कूटनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और वैश्विक समुदाय तेल आपूर्ति में व्यवधान को लेकर चिंतित है। आधिकारिक बयानों के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय शांति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अपनी संप्रभुता और अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।
शांति बहाली के लिए तीन अनिवार्य शर्तें
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से उन शर्तों का विवरण साझा किया जो ईरान के अनुसार संघर्ष को समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं। पहली शर्त के रूप में, तेहरान ने अपने 'वैध अधिकारों' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की मांग की है। दूसरी शर्त के तहत, ईरान ने संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए हर्जाने या मुआवजे के भुगतान पर जोर दिया है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित हमले के खिलाफ एक ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी की मांग है। राष्ट्रपति के अनुसार, इन तीन स्तंभों के बिना क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
रूस और पाकिस्तान की कूटनीतिक मध्यस्थता
क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए रूस और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने पुष्टि की है कि उन्होंने रूसी और पाकिस्तानी नेताओं के साथ विस्तृत टेलीफोनिक वार्ता की है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य संघर्ष के विस्तार को रोकना और एक कूटनीतिक समाधान खोजना है। ईरान इन देशों को अपने महत्वपूर्ण क्षेत्रीय साझेदार के रूप में देखता है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, रूस और पाकिस्तान दोनों ही पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि युद्ध का लंबा खिंचना वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक प्रभाव
ईरान और इजराइल के बीच जारी इस संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखा जा रहा है। स्ट्रेट ऑफ हर्मोज के आसपास बढ़ते तनाव और संभावित बंदी की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर दी है। चूंकि यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए इसके बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे कई देशों में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ेगा।
अमेरिका और इजराइल पर ईरान का आधिकारिक रुख
ईरानी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक बयान में इस युद्ध के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस संघर्ष को 'जायोनी शासन' और अमेरिका द्वारा भड़काया गया युद्ध करार दिया। पेजेशकियान ने तर्क दिया कि ईरान पर यह युद्ध थोपा गया है और तेहरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य कार्रवाई उसके संप्रभु अधिकारों की रक्षा के लिए है। ईरान का मानना है कि अमेरिका द्वारा इजराइल को दिया जा रहा समर्थन इस क्षेत्र में अस्थिरता का मुख्य कारण है।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी की आवश्यकता
ईरान द्वारा मांगी गई अंतरराष्ट्रीय गारंटी का उद्देश्य भविष्य में होने वाली सैन्य आक्रामकता को रोकना है। तेहरान चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र या अन्य वैश्विक शक्तियां यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में उसकी सीमाओं या संपत्तियों पर हमले नहीं होंगे। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने जोर देकर कहा कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय तंत्र की आवश्यकता है। ईरान के अनुसार, पिछले अनुभवों को देखते हुए, भविष्य की सुरक्षा के लिए पक्की गारंटी ही एकमात्र रास्ता है जिससे वह अपनी सैन्य मुद्रा को कम करने पर विचार कर सकता है।