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ईरान: मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर, 19वें रमजान को हुई घोषणा

ईरान: मोजतबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर, 19वें रमजान को हुई घोषणा
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ईरान के सरकारी समाचार चैनल ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर चुन लिया है। मोजतबा खामेनेई, आयतुल्लाह अली खामेनेई के पुत्र हैं। यह महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम एक ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा का चयन उनके पिता की विरासत को आगे बढ़ाने और देश की धार्मिक व राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।

ईरान की सरकार ने इस घोषणा के लिए रमजान के पवित्र महीने के 19वें दिन का चुनाव किया। यह समय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ईरान के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे में भी गहरा स्थान रखता है। मोजतबा खामेनेई का नाम लंबे समय से उत्तराधिकार की दौड़ में सबसे आगे चल रहा था, और अब असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने इस पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।

19वें रमजान का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

ईरान में सुप्रीम लीडर की घोषणा के लिए 19वें रमजान की तारीख का चयन काफी प्रतीकात्मक माना जा रहा है। इस्लामी इतिहास के अनुसार, रमजान का 19वां दिन शिया मुसलमानों के लिए अत्यंत शोक और श्रद्धा का विषय है। इसी दिन पैगंबर मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद, हजरत अली पर कूफा की मस्जिद में फज्र की नमाज के दौरान हमला किया गया था। हजरत अली को शिया समुदाय अपना पहला इमाम मानता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम नामक व्यक्ति ने जहर से बुझी तलवार से हजरत अली पर उस समय हमला किया जब वे सजदे में थे। इस हमले के दो दिन बाद, 21 रमजान को उनकी शहादत हुई थी। ईरान जैसे शिया बहुल देश में इस तारीख को सत्ता का हस्तांतरण या बड़े नेतृत्व का ऐलान करना धार्मिक भावनाओं और ऐतिहासिक निरंतरता को जोड़ने का एक प्रयास माना जाता है।

हजरत अली की शहादत और शब-ए-क़द्र का जुड़ाव

19वें रमजान की रात को 'शब-ए-क़द्र' या 'लैलतुल क़द्र' की पहली संभावित रात भी माना जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार, यह रात हजार महीनों से बेहतर है और इस रात इबादत करने का विशेष महत्व है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को 'क़द्र की पहली मुबारक रात' के साथ जोड़ते हुए इसे एक शुभ संकेत बताया।

ईरान में इस रात को लोग मस्जिदों और इमामबाड़ों में एकत्र होकर दुआएं मांगते हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस पवित्र अवसर पर नए नेतृत्व की घोषणा करने का उद्देश्य देश में एकता और धार्मिक निष्ठा का संदेश देना है। हजरत अली की शहादत की याद में पूरा देश इस दौरान शोक में डूबा रहता है, जिससे इस घोषणा को एक गंभीर और आध्यात्मिक स्वरूप प्राप्त हुआ है।

मोजतबा खामेनेई: उत्तराधिकार और आधिकारिक नियुक्ति

मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में हुआ था और वे आयतुल्लाह अली खामेनेई के दूसरे पुत्र हैं। उन्होंने लंबे समय तक ईरान के धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स, जो सुप्रीम लीडर के चयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार है, ने उनके नाम पर सहमति जताई। मोजतबा को उनके पिता के कार्यकाल के दौरान भी पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाला माना जाता रहा है।

ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने इस नियुक्ति पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोजतबा खामेनेई को लीडरशिप सेमिनरी में उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मोजतबा अपने पिता से मिली शिक्षाओं के माध्यम से देश को सही दिशा में ले जाएंगे। आधिकारिक बयानों में उनकी विद्वता और प्रशासनिक समझ पर विशेष जोर दिया गया है।

ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा परिषद की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं

नियुक्ति के बाद ईरान के विभिन्न सरकारी अंगों से प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मोजतबा खामेनेई को 'इस्लामी क्रांति के तीसरे सुप्रीम लीडर' के रूप में संबोधित किया। उन्होंने इस चयन को देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने भी उनके नेतृत्व में ईरान के विकास की कामना की है।

सरकारी मीडिया के अनुसार, यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न हुई है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा के धार्मिक ज्ञान और राजनीतिक अनुभव को उनकी योग्यता का मुख्य आधार बताया है। ईरान के भीतर इस घोषणा को सत्ता की निरंतरता सुनिश्चित करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब देश बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

ईरान में सुप्रीम लीडर के चयन की संवैधानिक प्रक्रिया

ईरान के संविधान के अनुसार, सुप्रीम लीडर का पद देश का सर्वोच्च पद है, जिसके पास सेना, न्यायपालिका और राज्य मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण होता है। सुप्रीम लीडर का चयन 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' द्वारा किया जाता है, जिसमें 88 धार्मिक विद्वान शामिल होते हैं। ये सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं, लेकिन उनकी योग्यता की जांच गार्जियन काउंसिल द्वारा की जाती है।

मोजतबा खामेनेई का चयन इसी संवैधानिक ढांचे के भीतर किया गया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान में केवल दो सुप्रीम लीडर रहे हैं—आयतुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी और आयतुल्लाह अली खामेनेई। मोजतबा अब इस श्रृंखला में तीसरे व्यक्ति बन गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उनकी नियुक्ति का उद्देश्य इस्लामी गणराज्य के सिद्धांतों को अक्षुण्ण रखना और भविष्य की चुनौतियों के लिए नेतृत्व को तैयार करना है।

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