ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका के साथ सीधी वार्ता को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक कोई भी प्रत्यक्ष बातचीत संभव नहीं है और पेज़ेश्कियन ने वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत से साफ इनकार करते हुए जोर दिया कि शांति के मार्ग में संवाद की कमी नहीं, बल्कि अमेरिका की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां मुख्य बाधा हैं। शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ फोन पर हुई एक महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने अपनी इस स्थिति को दोहराया।
पेज़ेश्कियन की अमेरिका को सख्त चेतावनी
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या आर्थिक और सैन्य नाकाबंदी के साये में बातचीत की मेज पर नहीं आएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि मौजूदा संकट का मूल कारण संवाद का अभाव नहीं है, बल्कि अमेरिका की शत्रुतापूर्ण नीतियां हैं। उनके अनुसार, जब तक अमेरिका अपनी इन कार्रवाइयों और दबाव को बंद नहीं करता, तब तक भरोसे का माहौल बनाना और कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना अत्यंत कठिन होगा।
नाकाबंदी हटाने की अनिवार्य शर्त
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को सुझाव दिया कि यदि वह वास्तव में वार्ता फिर से शुरू करने का इच्छुक है, तो उसे सबसे पहले नौसैनिक नाकाबंदी सहित सभी सैन्य और आर्थिक बाधाओं को हटाना होगा और उन्होंने कहा कि यह कदम विश्वास बहाली की दिशा में पहला ठोस संकेत माना जाएगा। पेज़ेश्कियन ने आगे कहा कि अमेरिका को हमारी सलाह है कि वह पहले नौसैनिक नाकाबंदी जैसी बाधाओं को दूर करे, ताकि संवाद के लिए एक उचित मंच तैयार हो सके और लंबित मुद्दों को सुलझाया जा सके।
आठ हफ्तों से जारी तनाव और क्षेत्रीय स्थिति
यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले आठ हफ्तों से तनाव चरम पर है। 13 अप्रैल से लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ईरान के कई महत्वपूर्ण बंदरगाह बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इससे पहले इस्लामाबाद में आयोजित उच्च स्तरीय शांति वार्ता भी बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई थी, जिससे कूटनीतिक स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
डोनाल्ड ट्रंप का फैसला और अमेरिकी रुख
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉप की प्रस्तावित पाकिस्तान यात्रा को रद्द कर दिया है। पाम बीच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बोलते हुए ट्रंप ने इस यात्रा को 'महंगा और लंबा' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे अधिकारियों से मिलने का कोई औचित्य नहीं है जिनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान सीमित है और ट्रंप ने कहा कि हम उन लोगों से मिलने के लिए 15-16 घंटे की यात्रा नहीं करेंगे जिनके बारे में पहले किसी ने सुना भी नहीं है।
ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि ईरान का प्रस्ताव काफी था लेकिन पर्याप्त नहीं था, विशेष रूप से 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन रोकने की अमेरिकी मांग के संदर्भ में। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि यात्रा रद्द होने के बाद ईरान ने तुरंत एक संशोधित और बेहतर प्रस्ताव पेश किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन की मूल मांग में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने युद्धविराम को लेकर चिंताओं को भी खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने इसके बारे में सोचा भी नहीं है।
इस्लामाबाद में मध्यस्थता प्रयासों पर अनिश्चितता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जानकारी दी कि तेहरान ने संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ एक व्यावहारिक ढांचा साझा किया था। हालांकि, उन्होंने अमेरिका की कूटनीतिक प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल उठाए। ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों की आधिकारिक सूची सौंपने के बाद इस्लामाबाद से वापस लौट गया है, जिससे पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद से लौटने के बाद पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों पर अनिश्चितता छा गई है।