Iran Protests News: ईरान में विरोध प्रदर्शन: सरकार ने मानी 5 हजार से ज्यादा मौतें, 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल
Iran Protests News - ईरान में विरोध प्रदर्शन: सरकार ने मानी 5 हजार से ज्यादा मौतें, 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल
ईरान में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। ईरानी सरकार ने स्वीकार किया है कि इन हिंसक प्रदर्शनों में 5,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है और इस आंकड़े में लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं, जो इन झड़पों के दौरान अपनी जान गंवा बैठे। सरकार ने इन मौतों और व्यापक हिंसा के लिए 'आतंकवादियों' और 'हथियारबंद उपद्रवियों' को। जिम्मेदार ठहराया है, जिन पर कई निर्दोष ईरानी नागरिकों की हत्या का आरोप है।
हिंसा का केंद्र: कुर्द इलाके
सुरक्षा कारणों से अपनी पहचान गुप्त रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि। सबसे अधिक हिंसा और मौतें उत्तर-पश्चिम ईरान के कुर्द इलाकों में दर्ज की गईं। यह क्षेत्र लंबे समय से अशांति और कुर्द अलगाववादी समूहों की गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। पिछले वर्षों में भी जब-जब बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, कुर्द इलाकों में झड़पें सबसे ज्यादा हिंसक रही हैं, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। इन क्षेत्रों में जातीय तनाव और राजनीतिक असंतोष अक्सर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को भड़काता रहा है।विदेशी ताकतों पर आरोप
ईरानी अधिकारी ने यह भी दावा किया कि मरने वालों की संख्या में अब बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों को इजराइल और विदेशों में सक्रिय हथियारबंद समूहों से समर्थन और हथियार मिले थे। ईरान सरकार अक्सर देश में होने वाली किसी भी अशांति के लिए विदेशी ताकतों, विशेष रूप से अपने कट्टर दुश्मन इजराइल को जिम्मेदार ठहराती रही है। पिछले साल जून में इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले भी किए थे, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था।मानवाधिकार संगठनों के दावे
दूसरी ओर, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने शनिवार को एक अलग आंकड़ा पेश किया। HRANA के अनुसार, अब तक 3,308 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,382 मामलों की अभी भी जांच चल रही है और संगठन ने यह भी दावा किया कि इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान 24,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नॉर्वे स्थित ईरानी कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने भी HRANA के दावों का समर्थन करते हुए बताया कि दिसंबर के आखिर में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पश्चिम के कुर्द इलाकों में ही सबसे ज्यादा और सबसे हिंसक झड़पें हुई थीं। ये आंकड़े सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से भिन्न हैं, जो स्थिति की गंभीरता और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी में अंतर को दर्शाते हैं।व्यापक नुकसान और तबाही
ईरान में 19 दिनों तक चले इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद अब हालात शांत बताए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रदर्शनों ने देश को भारी नुकसान पहुंचाया है और आंकड़ों के अनुसार, 30 प्रांतों में लगभग 250 मस्जिदें और 20 धार्मिक केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, 182 एम्बुलेंस और अग्निशमन विभाग के उपकरणों को मिलाकर कुल 5 और 3 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। बैंकिंग क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है, जहां 317 बैंक शाखाएं पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं और 4,700 बैंकों को 10% से 90% तक नुकसान हुआ है।बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक धरोहरों पर असर
वित्तीय और धार्मिक संस्थानों के अलावा, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक धरोहरों को भी गंभीर नुकसान हुआ है और 1,400 एटीएम को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से 250 एटीएम पूरी तरह बंद हो गए हैं। बिजली क्षेत्र में भी 6. 6 मिलियन डॉलर का नुकसान दर्ज किया गया है, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई होगी। शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी धरोहरों पर भी इन हिंसक घटनाओं का बुरा असर पड़ा है। 265 स्कूल और शिक्षा केंद्र, 3 बड़ी लाइब्रेरी, 8 सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल, और 4 सिनेमाघर क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह व्यापक नुकसान देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर। गहरा प्रभाव डालेगा, जिसकी भरपाई में लंबा समय लग सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान में हुए ये विरोध प्रदर्शन न केवल जानलेवा साबित हुए हैं, बल्कि इन्होंने देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक विरासत को भी भारी क्षति पहुंचाई है। सरकार और मानवाधिकार संगठनों के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर मतभेद के बावजूद, यह स्पष्ट है कि देश ने एक गंभीर संकट का सामना किया है।