ईरान सरकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एक नई रणनीतिक योजना पर विचार कर रही है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा युआन में करने की शर्त रख सकता है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में डॉलर के एकाधिकार को कम करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में युआन की स्वीकार्यता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
युआन में व्यापार की प्रस्तावित योजना
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, तेहरान एक ऐसी प्रणाली विकसित कर रहा है जिसके तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों को केवल तभी अनुमति दी जाएगी जब संबंधित व्यापार युआन में संपन्न हो। सूत्रों का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करना और चीन के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और अधिक मजबूत करना है। यदि यह योजना लागू होती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के पारंपरिक ढांचे को बदल सकती है, जहां दशकों से अमेरिकी डॉलर प्राथमिक मुद्रा रही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। यह खाड़ी देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने वाला एकमात्र समुद्री मार्ग है। अधिकारियों के मुताबिक, इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण या व्यापारिक शर्तों में बदलाव सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे इस मार्ग पर रणनीतिक बढ़त प्रदान करती है, जिसका उपयोग वह अपनी विदेश नीति के औजार के रूप में कर रहा है।
तेल की कीमतों में उछाल और बाजार की स्थिति
क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान की नई व्यापारिक शर्तों की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। यूक्रेन संघर्ष के बाद से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार की बाधा या नई व्यापारिक शर्तों के लागू होने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे आने वाले समय में कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वर्तमान में बाजार की नजरें ईरान के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं।
डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती और चीन की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में चीन लगातार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में युआन के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र में चीन ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ युआन में भुगतान करने की संभावनाओं पर चर्चा की है और रूस पर लगे प्रतिबंधों के बाद मास्को ने भी अपने तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा युआन और रूबल में स्थानांतरित कर दिया है। ईरान का यह संभावित निर्णय चीन की 'डी-डलराइजेशन' (De-dollarization) की नीति को बल दे सकता है, जिससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में डॉलर की स्थिति कमजोर हो सकती है।
रूस पर प्रभाव और भू-राजनीतिक समीकरण
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सक्रियता और तेल व्यापार के नियमों में बदलाव का सीधा असर रूस पर भी पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, जब ईरान ने पूर्व में इस मार्ग से आवाजाही को सीमित किया था, तब वैश्विक बाजार में तेल की कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका ने रूसी तेल क्षेत्र पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी। इससे रूस को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ, जिसका उपयोग वह अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में कर रहा है। ईरान की नई योजना से वैश्विक ऊर्जा राजनीति के समीकरण और अधिक जटिल होने की संभावना है, जिससे पश्चिमी देशों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।