ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले प्रत्येक तेल टैंकर पर 2 मिलियन डॉलर का शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। यह कदम वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक पर ईरान के नियंत्रण को और मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है और अमेरिकी समाचार नेटवर्क सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस क्षेत्र में अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर नई व्यवस्था कायम करना चाहता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए 48 घंटे के भीतर जलमार्ग को पूरी तरह खोलने का आदेश दिया है।
टैंकरों पर प्रस्तावित शुल्क और ईरान की रणनीति
ईरान की ओर से प्रस्तावित 2 मिलियन डॉलर का शुल्क उन सभी जहाजों पर लागू करने की योजना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में प्रवेश करते हैं। सूत्रों का कहना है कि ईरान इस जलमार्ग पर अपने संप्रभु अधिकारों का दावा कर रहा है और यह तय करने की कोशिश कर रहा है कि कौन से जहाज यहां से गुजर सकते हैं। यह कदम न केवल आर्थिक लाभ के लिए है, बल्कि इजरायल और उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है और अधिकारियों के अनुसार, ईरान इस शुल्क के माध्यम से एक नई क्षेत्रीय व्यवस्था स्थापित करना चाहता है, जहां जलमार्ग के उपयोग की शर्तें पूरी तरह से तेहरान द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
डोनाल्ड ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस संभावित कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फ्लोरिडा में सप्ताहांत के दौरान सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का समय दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह से नहीं खोलता है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बाधाएं उत्पन्न करना बंद नहीं करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ईरान के विभिन्न ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाएगा और इसकी शुरुआत ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा संयंत्र से की जाएगी। यह अल्टीमेटम क्षेत्र में युद्ध की संभावनाओं को और अधिक बढ़ा देता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदु है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% से अधिक हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे प्रमुख तेल निर्यातक देश अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। ईरान द्वारा इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का टैक्स लगाना या इसे बाधित करना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।
वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान 2 मिलियन डॉलर प्रति टैंकर का शुल्क लागू करता है, तो इससे वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है। परिवहन लागत में इस तरह की अचानक वृद्धि से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप पर घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों को नियंत्रित करने का दबाव है, और ईरान इसी दबाव का फायदा उठाना चाहता है। ईरान की शर्तें न मानने पर ट्रंप के राजनीतिक करियर पर पड़ने वाले प्रभाव की भी चर्चा की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक अस्थिर वातावरण पैदा कर सकती है।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक गतिरोध
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने पहले ही मध्य पूर्व में अस्थिरता पैदा कर दी है। अब अमेरिका की सीधी सैन्य चेतावनी ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, ईरान का मानना है कि ट्रंप को नेतन्याहू द्वारा बनाए गए कूटनीतिक जाल से बाहर निकलना चाहिए और ईरान की शर्तों पर विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने ऊर्जा हितों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के रास्ते लगभग बंद नजर आ रहे हैं, जिससे सैन्य टकराव की आशंका प्रबल हो गई है।