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अब्दुल बासित का बयान: पाकिस्तान पर हमले की स्थिति में दिल्ली-मुंबई को निशाना बनाने की धमकी

अब्दुल बासित का बयान: पाकिस्तान पर हमले की स्थिति में दिल्ली-मुंबई को निशाना बनाने की धमकी
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भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक अत्यंत विवादास्पद और उत्तेजक बयान दिया है। एक चर्चा के दौरान बासित ने कहा कि यदि पाकिस्तान पर किसी बाहरी शक्ति द्वारा हमला किया जाता है, तो पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई के रूप में भारत के प्रमुख शहरों, विशेष रूप से नई दिल्ली और मुंबई को निशाना बना सकता है। बासित ने यह टिप्पणी एक काल्पनिक युद्ध की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में की। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल है और किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में पाकिस्तान के पास भारत पर हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

अब्दुल बासित का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बासित ने विशेष रूप से अमेरिका का जिक्र करते हुए कहा कि यदि अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो पाकिस्तान बिना किसी देरी के भारत के महानगरों पर हमला करेगा। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान चुप नहीं बैठेगा और परिणाम की चिंता किए बिना कड़ा रुख अपनाएगा। हालांकि, उन्होंने बार-बार यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसी स्थिति असंभव है और न तो भारत और न ही पाकिस्तान युद्ध की इच्छा रखते हैं।

बासित का काल्पनिक संघर्ष और अमेरिका का संदर्भ

अब्दुल बासित ने अपनी बातचीत के दौरान एक ऐसी स्थिति का वर्णन किया जिसमें अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला होता है, तो पाकिस्तान की रणनीति में भारत को निशाना बनाना शामिल होगा। बासित के अनुसार, पाकिस्तान ऐसी स्थिति में भारत के दिल्ली और मुंबई जैसे रणनीतिक और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाने में संकोच नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सुरक्षा नीति के तहत यह एक संभावित प्रतिक्रिया हो सकती है। बासित ने इस बात पर जोर दिया कि हालांकि यह एक काल्पनिक परिदृश्य है, लेकिन पाकिस्तान की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताएं किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

भारत में राजनयिक कार्यकाल और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अब्दुल बासित भारत के लिए कोई नया नाम नहीं हैं और उन्होंने वर्ष 2014 से 2017 तक नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया था। उनका यह कार्यकाल भारत और पाकिस्तान के बीच अत्यंत तनावपूर्ण संबंधों का गवाह रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान ही उरी हमला और उसके बाद भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं हुई थीं। एक पूर्व शीर्ष राजनयिक होने के नाते, उनके बयानों को कूटनीतिक हलकों में गंभीरता से देखा जाता है और बासित का भारत के साथ सीधा जुड़ाव रहा है, जिसके कारण उनके द्वारा भारतीय शहरों को निशाना बनाने की बात कहना क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

अफगानिस्तान के साथ बढ़ता सीमा विवाद और सैन्य तनाव

बासित का यह बयान पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि में आया है। हाल के दिनों में, अफगान अधिकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर काबुल, कंधार और पक्तिका जैसे क्षेत्रों में हवाई हमले करने का आरोप लगाया है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर नागरिक ठिकानों और एक पुनर्वास केंद्र को निशाना बनाया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, और हालिया झड़पों ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है। बासित की टिप्पणियों को इसी क्षेत्रीय अस्थिरता के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

तालिबान के आरोप और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई

अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। तालिबान के अनुसार, पाकिस्तानी विमानों ने अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और बमबारी की, जिससे जान-माल का नुकसान हुआ है। पाकिस्तान इन हमलों को अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक बताता रहा है, विशेष रूप से उन उग्रवादी समूहों के खिलाफ जो सीमा पार से पाकिस्तान में हमले करते हैं और इस सीमावर्ती संघर्ष ने पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को असुरक्षित बना दिया है, जिससे पाकिस्तानी नेतृत्व और पूर्व अधिकारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। बासित का बयान इसी दबाव और क्षेत्रीय असुरक्षा की भावना को दर्शाता है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएं

अब्दुल बासित के इस बयान पर अभी तक भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान केवल घरेलू राजनीति को साधने या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करने के लिए दिए जाते हैं। भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में, एक पूर्व उच्चायुक्त द्वारा परमाणु संपन्न पड़ोसी देश के शहरों पर हमले की बात करना गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए इस तरह की बयानबाजी बाधक सिद्ध हो सकती है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और पाकिस्तान की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा नीतियों पर टिकी हुई हैं।

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