मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक व्यापक सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है। इन हमलों में ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को खो दिया है। भारी नुकसान के बावजूद ईरान ने समर्पण करने से इनकार कर दिया है और युद्ध के मैदान में डटा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि ईरान इस युद्ध में अकेला नहीं है, बल्कि उसे कई शक्तिशाली देशों और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों का समर्थन प्राप्त है।
रूस और ईरान की रणनीतिक और सैन्य साझेदारी
रूस और ईरान के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देश वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रभाव को कम करने के साझा लक्ष्य पर काम कर रहे हैं और यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों ने उसे ईरान के और करीब ला दिया है। रूस ने ईरान पर हुए अमेरिकी और इजराइली हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। कूटनीतिक स्तर पर रूस संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बचाव कर रहा है। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति जारी रहने की खबरें हैं। रूस का रुख यह है कि वह ईरान की सरकार को अस्थिर होने से बचाना चाहता है, हालांकि वह सीधे तौर पर युद्ध में शामिल होने से बच रहा है।
चीन की आर्थिक और कूटनीतिक जीवन-रेखा
चीन वर्तमान में ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद चीन ने ईरान से कच्चे तेल का आयात जारी रखा है, जो ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा है। चीन ने ईरान के साथ 25 साल के व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन लगातार अमेरिका की 'शासन परिवर्तन' (Regime Change) की नीति का विरोध करता रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयानों के अनुसार, बीजिंग मध्य पूर्व में शांति के लिए कूटनीतिक समाधान का पक्षधर है, लेकिन वह ईरान की सुरक्षा चिंताओं को भी जायज मानता है और चीन का समर्थन मुख्य रूप से आर्थिक और कूटनीतिक है, जिससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय दबाव झेलने में मदद मिल रही है।
क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों और प्रॉक्सी नेटवर्क की भूमिका
ईरान को सबसे सक्रिय सैन्य समर्थन उसके क्षेत्रीय सहयोगियों और सशस्त्र समूहों से मिल रहा है। लेबनान का हिजबुल्लाह संगठन इजराइल की उत्तरी सीमा पर लगातार रॉकेट हमले कर रहा है, जिससे इजराइली सेना को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है। इसी तरह, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर दबाव बनाया है। इराक में सक्रिय शिया मिलिशिया समूहों ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है और ये समूह सीधे तौर पर ईरान के आदेशों या उसकी रणनीतिक दिशा के अनुसार कार्य कर रहे हैं। सीरिया की सरकार ने भी ईरान को अपना पूर्ण समर्थन दिया है, क्योंकि ईरान ने सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान असद सरकार की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पाकिस्तान और पड़ोसी देशों का कूटनीतिक रुख
ईरान के पड़ोसी देश पाकिस्तान ने इस संघर्ष में एक संतुलित लेकिन सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया है और पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर ईरान पर हुए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और संयम बरतने की अपील की और हालांकि पाकिस्तान सीधे तौर पर सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं है, लेकिन उसने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान के पक्ष में कूटनीतिक बयान दिए हैं। बेलारूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों ने भी अमेरिका विरोधी रुख अपनाते हुए ईरान को अपना नैतिक और तकनीकी समर्थन देने की बात कही है। इन देशों का मानना है कि अमेरिका की एकतरफा कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है।
खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जटिल स्थिति
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे खाड़ी देशों की स्थिति इस युद्ध में अत्यंत जटिल है। ये देश पारंपरिक रूप से ईरान के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन वे इस समय सीधे युद्ध में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। इन देशों ने हमलों की आलोचना की है और अपनी ऊर्जा आपूर्ति व सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और भारत ने इस पूरे मामले में बेहद संतुलित रुख अपनाते हुए कूटनीति और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। भारत की मुख्य चिंता क्षेत्र में रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान को मिल रहा यह बहुआयामी समर्थन उसे लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता प्रदान कर रहा है।