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ईरान-अमेरिका वार्ता विफल: होर्मुज पर तेहरान का कड़ा रुख, गेंद वाशिंगटन के पाले में

ईरान-अमेरिका वार्ता विफल: होर्मुज पर तेहरान का कड़ा रुख, गेंद वाशिंगटन के पाले में
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इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आयोजित उच्च स्तरीय वार्ता किसी ठोस परिणाम पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई है। तेहरान ने वाशिंगटन द्वारा रखी गई शर्तों को मानने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध और गहरा गया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित शर्तें 'गैर-कानूनी' और 'अव्यावहारिक' थीं। इस विफलता के बाद ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब समझौते की जिम्मेदारी पूरी तरह से अमेरिका पर है और उसे अपना रुख यथार्थवादी बनाना होगा।

अमेरिकी शर्तों को ईरान ने किया खारिज

ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तेहरान ने वार्ता के दौरान अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का तर्क है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। ईरानी पक्ष ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सरकार न केवल युद्ध के मैदान में बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी गलत आकलन कर रही है और सूत्रों के अनुसार, ईरान को किसी भी समझौते के लिए कोई जल्दबाजी नहीं है और वह तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक कि एक तर्कसंगत और न्यायसंगत प्रस्ताव सामने नहीं आता।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बरकरार रहेगा गतिरोध

इस वार्ता का एक मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका एक उचित समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखेगा। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

जेडी वेंस का बयान और परमाणु प्रतिबद्धता

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस वार्ता की विफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि 21 घंटे तक चली मैराथन बातचीत के बावजूद कोई शांति समझौता नहीं हो सका। वेंस के अनुसार, तेहरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता सहित कई प्रमुख अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान वे लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संपर्क में थे और अमेरिका ने अपनी 'रेड लाइन' पहले ही स्पष्ट कर दी थी। वेंस ने इस स्थिति को ईरान के लिए एक बड़ा नुकसान करार दिया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा पर प्रभाव

इस्लामाबाद में हुई यह बैठक पिछले एक दशक से अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी वार्ता थी। इस बैठक के विफल होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह वार्ता दो सप्ताह से जारी युद्ध विराम को स्थायी बनाने और वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच अगले दौर की बातचीत के लिए कोई समय या स्थान निर्धारित नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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