पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच आयोजित शांति वार्ता बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान द्वारा अमेरिकी शर्तों को स्वीकार न करने के कारण अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट रहा है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम के बीच आयोजित की गई थी।
वार्ता की विफलता और अमेरिकी रुख
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरानी अधिकारियों के बीच लगभग 21 घंटों तक गहन चर्चा हुई। वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ मेज पर आया था, जिन्हें ईरान ने मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया और उन्होंने कहा कि समझौते तक न पहुंच पाना अमेरिका से कहीं अधिक ईरान के लिए एक बड़ा नुकसान है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का आधिकारिक बयान
जेडी वेंस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। उन्होंने सीधे तौर पर ईरान के अड़ियल रुख को वार्ता की विफलता का कारण बताया और वेंस ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अब बिना किसी समझौते के स्वदेश वापसी की प्रक्रिया शुरू कर चुका है, क्योंकि आगे की बातचीत के लिए कोई साझा आधार नहीं बचा था।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना
वार्ता के विफल होने के बावजूद, अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने मेजबान देश पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। वेंस के अनुसार, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने और समझौते तक पहुंचने में मदद करने के लिए शानदार काम किया और हर संभव कूटनीतिक सहयोग प्रदान किया।
21 घंटों की मैराथन चर्चा का विवरण
इस्लामाबाद में हुई यह शांति वार्ता अत्यंत गहन रही, जिसमें 21 घंटों से अधिक समय तक लगातार संवाद चलता रहा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के साथ कई दौर की बैठकें कीं, लेकिन अंततः शर्तों पर असहमति के कारण बातचीत टूट गई।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की स्थिति
इस वार्ता की विफलता के बाद अब क्षेत्र में सुरक्षा स्थितियों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और दो हफ्ते के युद्धविराम के दौरान इस वार्ता को शांति की एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा था। फिलहाल, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की वापसी के साथ ही इस्लामाबाद में चल रहा यह कूटनीतिक मिशन समाप्त हो गया है और दोनों देश अब अपनी अगली रणनीतियों पर विचार कर रहे हैं।