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ईरान-अमेरिका शांति समझौता: पाकिस्तान में दूसरे दौर की बैठक, 20 साल का युद्धविराम प्रस्ताव

ईरान-अमेरिका शांति समझौता: पाकिस्तान में दूसरे दौर की बैठक, 20 साल का युद्धविराम प्रस्ताव
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पाकिस्तान में शांति समझौते का दूसरा दौर

पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच पीस डील को लेकर दूसरे राउंड की बैठक होने जा रही है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो इस महत्वपूर्ण मीटिंग में दोनों देशों के बीच समझौते पर अंतिम सहमति बन सकती है। इस वार्ता के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। वर्तमान प्रस्ताव के संकेतों के अनुसार, इस बार समझौते की शर्तों में अमेरिका के मुकाबले ईरान का पलड़ा अधिक भारी नजर आ रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में स्पष्ट किया है कि वे 2015 में ओबामा शासन के दौरान हुए समझौते से कहीं बेहतर और प्रभावी समझौता करेंगे।

प्रस्तावित डील के मुख्य बिंदु और युद्धविराम

अमेरिकी आउटलेट एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सहयोग से तैयार किए गए इस प्रस्ताव में ईरान के साथ 20 साल के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। इसका अर्थ यह है कि अगले दो दशकों तक ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी प्रकार का युद्ध नहीं होगा। इस अवधि के दौरान ईरान परमाणु हथियार बनाने का कोई प्रयास नहीं करेगा। हालांकि, ईरान इस समयसीमा को घटाकर 10 साल तक सीमित करने की कोशिश में है। उल्लेखनीय है कि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में हुए समझौते में यह समयसीमा 15 साल निर्धारित की गई थी।

अनसुलझे मुद्दे और यूरेनियम का भविष्य

समझौते की मेज पर अभी भी दो प्रमुख विषयों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। पहला मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz) में एक स्थायी टोल बूथ के निर्माण को लेकर है। दूसरा महत्वपूर्ण विवाद यूरेनियम के निपटान के स्थान को लेकर है कि इसका खात्मा अमेरिका में होगा या ईरान में। ईरान का पक्ष है कि यूरेनियम को उसकी अपनी जमीन पर ही पतला (dilute) किया जाना चाहिए।

रणनीतिक दृष्टिकोण और ऐतिहासिक संदर्भ

ईरान की ओर से इस पीस डील का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका इस समझौते को अपनी जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान किसी के बहकावे या दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौता केवल ईरान के हितों के अनुरूप ही होगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जहां डोनाल्ड ट्रंप एक त्वरित और बड़ी जीत की तलाश में हैं, वहीं ईरान एक दीर्घकालिक 'विनिंग फॉर्मूला' सेट करना चाहता है। ईरान इस मामले में लीबिया के उदाहरण से सतर्क है, जहां 2003 में मुअम्मर गद्दाफी ने अमेरिका के साथ यूरेनियम समझौता किया था, लेकिन 2011 में अमेरिका के कथित धोखे के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी।

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