भारत जिन देशों से कच्चा तेल खरीदता है, उनमें शामिल इराक के लिए एक अहम बदलाव हुआ है। इराक और सीरिया के बीच 10 साल से ज्यादा समय से बंद पड़ा बॉर्डर क्रॉसिंग फिर से खोल दिया गया है। इस क्रॉसिंग को इराक में रबिया और सीरिया में यारूबिया कहा जाता है। यह बॉर्डर 2011 में सीरिया में गृह युद्ध शुरू होने के बाद बंद हो गया था। इसके बाद 2014 में इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। बाद में इराकी कुर्द बलों ने इसे वापस अपने नियंत्रण में ले लिया। अब सोमवार को इस बॉर्डर को फिर से खोल दिया गया।
रबिया-यारूबिया बॉर्डर क्रॉसिंग का पुनरुद्धार और व्यापारिक महत्व
दोनों देशों के अधिकारियों ने बॉर्डर पर मिलकर व्यापार बढ़ाने और आवाजाही आसान करने पर विस्तृत चर्चा की और इराक के निनेवे प्रांत की नेता नादिया अल-जुबौरी ने इस अवसर पर कहा कि इस मार्ग के खुलने से व्यापार में वृद्धि होगी और तेल की सप्लाई के लिए एक बड़ा रास्ता उपलब्ध होगा। उल्लेखनीय है कि भारत के कुल तेल आयात का पांचवां हिस्सा इराक से आता है, इसलिए इस मार्ग का खुलना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता में कमी
इराक की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल पर निर्भर है और उसके बजट का करीब 90% हिस्सा तेल से आता है। अभी तक इराक का ज्यादातर तेल समुद्र के रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भेजा जाता है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल यहीं से गुजरता है। नई बॉर्डर क्रॉसिंग खुलने से अब इराक के पास तेल भेजने का एक और वैकल्पिक रास्ता मिल गया है। इससे समुद्री रास्ते पर निर्भरता कुछ कम हो सकती है, विशेषकर उन परिस्थितियों में जब होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बना रहता है।
जमीनी मार्ग से तेल आपूर्ति की नई योजना
इराक के बॉर्डर पोर्ट्स आयोग के प्रमुख उमर अल-वाएली ने जानकारी दी कि इस क्रॉसिंग के खुलने से अल-वलीद क्रॉसिंग पर दबाव कम होगा, जो अब तक इराक का मुख्य मार्ग था। नई व्यवस्था से ट्रांसपोर्ट और सप्लाई से जुड़ी बाधाएं कम होने की उम्मीद है। इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO अब सीरिया के रास्ते जमीन से तेल भेजने की योजना पर सक्रियता से काम कर रही है। 5 लाख मीट्रिक टन फ्यूल ऑयल इस रास्ते से भेजने का समझौता किया है।
इराक की तेल पाइपलाइनों की वर्तमान स्थिति
इराक से कुल 5 मुख्य ऑयल पाइपलाइंस निकलती हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 2 चालू हैं और 3 बंद पड़ी हैं। सबसे महत्वपूर्ण चालू पाइपलाइन किरकुक-सेहान पाइपलाइन है, जो उत्तरी इराक के किरकुक से तुर्की के जयहान बंदरगाह तक तेल ले जाती है। इसके अतिरिक्त, देश के भीतर 'इराक स्ट्रेटैजिक पाइपलाइन' भी कार्यरत है, जो बसरा (दक्षिण) से अनबर तक तेल पहुंचाने के लिए बनी तीन समानांतर लाइनों का एक नेटवर्क है।
इराक का अधिकांश तेल अभी भी दक्षिणी टर्मिनलों (पर्शियन गल्फ) के माध्यम से निर्यात किया जाता है और कई बड़ी पाइपलाइनें लंबे समय से बंद हैं, जिनमें किरकुक-बनियास पाइपलाइन शामिल है जो सीरिया के रास्ते भूमध्य सागर तक जाती थी और 2003 के बाद से बंद है। इसी प्रकार, सऊदी अरब के माध्यम से जाने वाली इराक पाइपलाइन (IPSA) भी 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद से बंद पड़ी है।