दुनिया एक बार फिर महायुद्ध की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को नक्शे से मिटाने। की धमकी दिए जाने के बाद अब तेहरान ने भी पलटवार किया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत स्थित प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी सैन्य कार्रवाई या नतीजे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप की विनाशकारी चेतावनी और ईरान का रुख
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस से लौटते समय ईरान को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया था और उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी नेतृत्व की ओर से अमेरिकी हितों या उनके जीवन पर कोई खतरा पैदा हुआ, तो ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटाया जा सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान में अब नए नेतृत्व की जरूरत है और 37 साल पुराने शासन को खत्म करने का समय आ गया है। इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में हड़कंप मच गया है।
ईरान का पलटवार: हम डरने वाले नहीं
ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने ट्रंप के इन बयानों को 'पुरानी बयानबाजी' करार दिया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि वॉशिंगटन की ओर से आने वाली धमकियों का ईरान पर कोई मनोवैज्ञानिक असर नहीं पड़ता। इलाही ने जोर देकर कहा कि ईरान एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपनी रक्षा करना बखूबी जानता है। उन्होंने कहा, "यह बयान नया नहीं है और हम दशकों से ऐसी धमकियां सुन रहे हैं और हम हर हालात के लिए तैयार हैं।
सैन्य हलचल और पेंटागन की तैयारी
तनाव केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है। एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को अमेरिकी सेंट्रल कमांड क्षेत्र में दोबारा तैनात किया गया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि एक बड़ी सेना ईरान की ओर बढ़ रही है, जिससे युद्ध की आशंका और प्रबल हो गई है।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान की सफाई
परमाणु हथियारों को लेकर उठ रहे सवालों पर इलाही ने ईरान का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता क्योंकि यह उनके सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के फतवे के अनुसार 'हराम' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की परमाणु गतिविधियां केवल चिकित्सा, ऊर्जा उत्पादन और मानवीय जरूरतों के लिए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि इजराइल जैसे देशों पर कोई दबाव नहीं डाला जाता, जबकि ईरान को निशाना बनाया जा रहा है।
आंतरिक अशांति और अंतरराष्ट्रीय दबाव
ईरान में हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों पर भी इलाही ने अपनी बात रखी। उन्होंने इंटरनेट बंद किए जाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम शांति बहाल करने के लिए जरूरी था और उन्होंने विदेशी ताकतों पर ईरान में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे। शक्तिशाली देशों के हाथों की कठपुतली बन गई हैं और अपना प्रभाव खो चुकी हैं।
क्या होगा अगला कदम?
फिलहाल स्थिति 'वेट एंड वॉच' की बनी हुई है और एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान झुकने को तैयार नहीं है। यदि कूटनीतिक रास्ते बंद होते हैं, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा सैन्य। टकराव पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और शांति को खतरे में डाल सकता है।