Iran Protest: ईरान में भड़का हिंसक आंदोलन, ग्रामीण इलाकों तक फैला विरोध, 7 की मौत

Iran Protest - ईरान में भड़का हिंसक आंदोलन, ग्रामीण इलाकों तक फैला विरोध, 7 की मौत
| Updated on: 02-Jan-2026 08:58 AM IST
ईरान में सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब एक बड़े और हिंसक आंदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी तेहरान से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब देश के ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंच गए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है और इन हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ईरान की पैरामिलिट्री फोर्सेस का एक जवान भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, 13 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं, जो देश भर में बढ़ती अशांति का संकेत है।

आर्थिक संकट और महंगाई ने बढ़ाई जनता की परेशानी

ईरान में इन विरोध प्रदर्शनों की जड़ें देश की खराब अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई में निहित हैं। जनता लंबे समय से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है, और अब उनका धैर्य जवाब दे गया है। गुरुवार को पांच लोगों की मौत हुई, जबकि एक शख्स की मौत बुधवार को हुई थी, जिससे कुल मृतकों की संख्या सात हो गई है। इन मौतों ने प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और भड़का दिया है, जिससे आंदोलन की तीव्रता में वृद्धि हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार। झड़पें हो रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

50 से अधिक शहरों तक फैला आंदोलन

तेहरान से शुरू हुआ यह आंदोलन अब ईरान के 50 से अधिक शहरों तक फैल चुका है। शुरुआत में यह प्रदर्शन बढ़ती महंगाई के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध के रूप में सामने आया था, लेकिन सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद यह और अधिक हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारी अब केवल आर्थिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 300 किलोमीटर दूर स्थित अजना शहर में हुई हैं। यह शहर ईरान के लोरेस्तान सूबे में पड़ता है, जहां स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।

सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें

ईरान के लोरदेगान प्रांत में सुरक्षा बलों और हथियारबंद प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने लोरदेगान में गवर्नर के कार्यालय में आग लगा दी, जो उनके बढ़ते आक्रोश और सरकार के प्रति विरोध का स्पष्ट संकेत है और इतना ही नहीं, खबरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने कुछ शहरों में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड की इमारतों पर भी कब्जा कर लिया है। अदालतों की इमारतों पर भी प्रदर्शनकारी बैठ गए हैं, जिससे सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है। इन घटनाओं से पता चलता है कि प्रदर्शनकारी अब केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि सरकारी प्रतिष्ठानों को भी निशाना बना रहे हैं।

गिरफ्तारियां और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टें

ईरान की सरकारी मीडिया ने इन विरोध प्रदर्शनों के संबंध में छह लोगों की गिरफ्तारी की खबर दी है। हालांकि, इन गिरफ्तारियों के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। दूसरी ओर, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के अलग-अलग शहरों में कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारियों की संख्या में यह अंतर सूचना के प्रवाह और सरकार द्वारा दी जा रही जानकारी पर सवाल खड़े करता है। इन गिरफ्तारियों से प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और भड़कने की आशंका है, जिससे आंदोलन और तेज हो सकता है।

तेहरान से शुरू हुई विरोध की चिंगारी

ईरान में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला राजधानी तेहरान से शुरू हुआ था। सबसे पहले तेहरान के कारोबारियों ने व्यापार की खराब होती हालत के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और उनकी शिकायतें आर्थिक नीतियों और व्यापारिक माहौल में गिरावट से संबंधित थीं। इसके बाद, व्यापारियों के इस विरोध प्रदर्शन में तेहरान यूनिवर्सिटी के छात्र भी शामिल हो गए, जिससे आंदोलन को एक नई गति मिली। छात्रों के जुड़ने से यह आंदोलन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित। न रहकर, व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असंतोष का प्रतीक बन गया। इसके बाद तो आंदोलन की आग दूसरे शहरों में तेजी से फैल। गई और अब पूरे ईरान में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं।

अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंधों का प्रभाव

ईरान की मौजूदा आर्थिक दुर्दशा के पीछे अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का एक लंबा इतिहास है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान पर ये प्रतिबंध लगे हुए हैं, जिन्होंने देश की माली हालत को खस्ता कर दिया है और बीते साल जून में, पहले इजरायल के साथ झड़प और फिर अमेरिकी बमबारी के बाद, ईरान ने न्यूक्लियर सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग बंद कर दिया। इस कदम के जवाब में, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर। नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ा। इन प्रतिबंधों ने ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत को बुरी तरह प्रभावित किया है।

ईरान की मुद्रा रियाल का अवमूल्यन और बढ़ती महंगाई

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की करेंसी रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई है। जो अमेरिकी डॉलर एक साल पहले लगभग 8 लाख रियाल में मिल रहा था, वह अब लगभग 15 लाख रियाल का हो चुका है। इस भारी अवमूल्यन ने आयात को महंगा कर दिया है और आम जनता की क्रय शक्ति को कम कर दिया है। ईरान में इस समय महंगाई की दर 50 फीसदी है, जो। आम लोगों के लिए जीवनयापन को बेहद मुश्किल बना रही है। खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।

बैकफुट पर ईरान सरकार और बातचीत का आश्वासन

जनता के बढ़ते गुस्से और व्यापक विरोध प्रदर्शनों को देखकर ईरान की सरकार भी बैकफुट पर है। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि उसे लोगों की। फिक्र है और वह प्रदर्शनकारियों की बात सुन रही है। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि पहले सरकार अक्सर ऐसे विरोध प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने का प्रयास करती थी। सरकार ने बातचीत के जरिए अमन कायम करने और सुधार करने का आश्वासन दिया है।

सरकार की प्रवक्ता का बयान

ईरान सरकार की प्रवक्ता फातिमा मोहाजिरानी ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''मैं दोहराना चाहती हूं कि भले ही हमारे मुल्क के नागरिक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और भले ही उनके प्रोटेस्ट बेहद उग्र हों फिर भी उनकी बातें सुनना सरकार का फर्ज है। '' उन्होंने आगे कहा, ''हम बातचीत के जरिए अमन कायम करने के लिए अपनी ओर से पुरजोर कोशिश करेंगे। बातचीत की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और सुधार भी किए जा रहे हैं और राष्ट्रपति ने हुक्म दिया है कि बातचीत का माहौल बनाया जाना चाहिए और इंशाअल्लाह हम बहुत जल्द समाज और अर्थव्यवस्था में स्थिरता कायम होते देखेंगे। '' यह बयान सरकार की ओर से स्थिति को शांत करने। और जनता के साथ संवाद स्थापित करने के प्रयास को दर्शाता है।

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