ईरान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र 'तेहरान टाइम्स' ने अपने पहले पन्ने पर संयुक्त राज्य अमेरिका को एक सीधी और गंभीर चेतावनी जारी की है। समाचार पत्र ने "नर्क में आपका स्वागत है" (Welcome to Hell) शीर्षक के साथ एक लेख प्रकाशित किया है, जिसमें कहा गया है कि ईरान की सीमाओं के भीतर कदम रखने वाले किसी भी अमेरिकी सैनिक को जीवित वापस नहीं जाने दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी मीडिया ने स्पष्ट किया है कि संभावित जमीनी आक्रमण की स्थिति में अमेरिकी सैनिकों को केवल ताबूतों में ही वापस भेजा जाएगा। यह तीखी प्रतिक्रिया उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है जिनमें दावा किया गया है कि वाशिंगटन मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के लिए 10,000 अतिरिक्त सैनिकों को भेजने पर विचार कर रहा है।
तेहरान टाइम्स की चेतावनी और 'वेलकम टू हेल' संदेश
ईरान के आधिकारिक रुख को दर्शाने वाले तेहरान टाइम्स ने अपने मुख्य पृष्ठ पर अमेरिकी सैन्य रणनीति के प्रति आक्रामक रुख अपनाया है। लेख में उल्लेख किया गया है कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का परिणाम घातक होगा और समाचार पत्र की यह हेडलाइन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिकी रक्षा विभाग की संभावित योजनाओं को चुनौती देती है। ईरानी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की संख्या में वृद्धि को एक उकसावे की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती की योजना
वॉल स्ट्रीट जर्नल और अन्य अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन मध्य पूर्व में लगभग 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सैन्य विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करना है। यह संभावित तैनाती उन हजारों पैराट्रूपर्स और मरीन के अतिरिक्त होगी जो पहले से ही इस क्षेत्र में तैनात हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि उनका ईरान के साथ पूर्ण युद्ध शुरू करने या जमीनी सेना भेजने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन सैन्य अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त बल आवश्यक हैं।
यमन और हूती विद्रोहियों के माध्यम से जवाबी कार्रवाई का संकेत
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका कोई जमीनी अभियान शुरू करता है, तो तेहरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को सक्रिय कर देगा। इसमें विशेष रूप से यमन के हूती विद्रोहियों का उल्लेख किया गया है। अधिकारी के अनुसार, हूतियों को लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमले फिर से शुरू करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इससे युद्ध का एक नया मोर्चा खुल सकता है, जो वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगा और ईरान का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह सीधे संघर्ष के बजाय 'प्रॉक्सी' युद्ध के माध्यम से भी अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है।
खारग द्वीप और रणनीतिक तैनाती के संभावित क्षेत्र
रिपोर्टों के अनुसार, यदि अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती होती है, तो उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के करीब रखा जा सकता है। इसमें ईरान के तट से कुछ ही दूरी पर स्थित खारग द्वीप का उल्लेख किया गया है और खारग द्वीप ईरान का एक महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सेना की इस क्षेत्र के करीब मौजूदगी को ईरान अपने आर्थिक हितों के लिए सीधे खतरे के रूप में देख रहा है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य हलचल तेल की वैश्विक कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
28 फरवरी के बाद से बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
मध्य पूर्व में तनाव की वर्तमान स्थिति 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद से और अधिक गंभीर हो गई है। तब से दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी और सैन्य तैयारियों में तेजी आई है। जहां एक ओर अमेरिका इसे रक्षात्मक कदम बता रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है। राजनयिक प्रयासों के बावजूद, जमीनी स्तर पर सैन्य जमावड़ा कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि दो प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।