प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार 28 मार्च को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ टेलीफोन पर विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा की चुनौतियां रहीं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए बताया कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है।
पश्चिम एशिया में तनाव का यह दौर 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से लगातार गहराता जा रहा है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते गतिरोध ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और इस संघर्ष को एक महीना बीत चुका है और इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए भारत और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत इस क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति की जल्द बहाली का समर्थन करता है।
ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोहराया कि ऊर्जा सुरक्षा न केवल क्षेत्र के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। पीएम मोदी ने कहा कि नागरिक और ऊर्जा अवसंरचना पर हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं और भारत ऐसे किसी भी कृत्य का विरोध करता है जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करता हो। सऊदी अरब, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक है, के लिए ऊर्जा केंद्रों की सुरक्षा एक प्राथमिक चिंता रही है और भारत ने इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है।
समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता पर सहमति
दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू समुद्री मार्गों की सुरक्षा रहा। प्रधानमंत्री मोदी और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस बात पर सहमत हुए कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना वैश्विक व्यापार के लिए आवश्यक है। लाल सागर और अरब सागर के आसपास के क्षेत्रों में शिपिंग लाइनों को खुला और सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया। हाल के समय में समुद्री व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते खतरों को देखते हुए दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत किया जाना चाहिए।
भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए आभार व्यक्त
प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब में रह रहे विशाल भारतीय समुदाय के प्रति सऊदी सरकार के निरंतर समर्थन के लिए क्राउन प्रिंस का आभार व्यक्त किया और सऊदी अरब में लाखों भारतीय नागरिक कार्यरत हैं जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय प्रवासियों का कल्याण भारत सरकार की प्राथमिकता है और सऊदी अरब द्वारा उन्हें प्रदान की जा रही सुरक्षा और अवसर सराहनीय हैं और क्राउन प्रिंस ने भी भारतीय समुदाय के योगदान की प्रशंसा की और भविष्य में भी उनके हितों की रक्षा का आश्वासन दिया।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निरंतर वैश्विक संवाद
पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर प्रधानमंत्री मोदी लगातार वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं। इससे पहले 24 मार्च को उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी इसी विषय पर चर्चा की थी। भारत का रुख हमेशा से तनाव कम करने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान निकालने का रहा है। सऊदी अरब के साथ यह संवाद भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना चाहता है। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी विभिन्न द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर निकट संपर्क बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संघर्ष के संभावित प्रभाव
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता का सीधा प्रभाव वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार मार्गों पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस क्षेत्र में शांति भारत के आर्थिक हितों के लिए भी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी और क्राउन प्रिंस की यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब दुनिया भर के देश आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंतित हैं। दोनों नेताओं ने माना कि क्षेत्रीय शांति केवल आर्थिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे की मजबूती के लिए भी अनिवार्य है।