इराक की ओपेक से बगावत: कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है भारी गिरावट

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
इराक की ओपेक से बगावत: कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है भारी गिरावट
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में एक बड़ी बगावत के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि इराक ने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन यानी ओपेक से बाहर निकलने की धमकी दी है। संयुक्त अरब अमीरात के बाद अब इराक भी इस ऑयल कार्टेल से अपनी राहें अलग करने पर विचार कर रहा है। इराक ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि यदि उसके तेल उत्पादन कोटा में बढ़ोतरी नहीं की गई, तो वह इस संगठन को छोड़ देगा। पिछले कुछ घंटों से इस खबर ने पूरी दुनिया के आर्थिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इराक का मानना है कि मौजूदा पाबंदियां उसकी आर्थिक प्रगति में बाधा बन रही हैं और उसे अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक तेल बेचने की आजादी चाहिए।

कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा भारी असर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर इराक ओपेक से बाहर हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर इसका क्या असर होगा। वर्तमान में इराक प्रतिदिन 4 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इराक अपनी मर्जी से उत्पादन शुरू करता है और इसे बढ़ाकर 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर देता है, तो बाजार में कच्चे तेल की भारी सप्लाई हो जाएगी। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें उस स्तर तक गिर सकती हैं जिसकी कल्पना ओपेक सदस्यों ने भी नहीं की होगी। जानकारों के अनुसार, इराक की इस बगावत से कच्चे तेल के दाम 50 से 55 डॉलर के बीच आ सकते हैं। इसका सीधा मतलब है कि मौजूदा स्तर से कीमतों में करीब 20 डॉलर यानी 25 से 30 फीसदी तक की बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

इराक क्यों छोड़ना चाहता है ओपेक का साथ

हालांकि बगदाद ने अभी संगठन छोड़ने का कोई तत्काल फैसला नहीं लिया है, लेकिन तेल मंत्रालय के प्रवक्ता सलीम अल-रिकबी ने ब्लूमबर्ग को बताया कि इराक का मानना है कि ओपेक को देश की उत्पादन क्षमता और आर्थिक जरूरतों के हिसाब से अपनी सीमाएं बढ़ानी चाहिए। अल-रिकबी ने कहा कि संगठन को इराक का उत्पादन स्तर बढ़ाना चाहिए, अन्यथा इराक को यह तय करना होगा कि वह ओपेक में बना रहे या बाहर निकल जाए। ओपेक अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन लक्ष्य और कोटा तय करता है ताकि वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। इराक इन्हीं कोटा सीमाओं से परेशान है क्योंकि उसे अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अधिक धन की आवश्यकता है।

ओपेक प्लस के भीतर बढ़ता तनाव

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी ओपेक प्लस के भीतर उत्पादन लक्ष्यों को लेकर बढ़ते तनाव के बीच आई है। इससे पहले यूएई भी इसी साल की शुरुआत में ओपेक से अलग हो गया था ताकि वह अपनी स्वतंत्र उत्पादन रणनीति अपना सके और रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि यदि बगदाद के कोटा में पर्याप्त वृद्धि नहीं की गई, तो इराकी अधिकारी निजी तौर पर इस समूह को छोड़ने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। इराक के तेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इराक की चिंताओं को पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और अन्य सहयोगियों को इस मामले को सुलझाना होगा, वरना इराक सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करने के लिए मजबूर होगा। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि बाहर निकलना अभी सिर्फ एक विचार है और इस पर कोई अंतिम नीति नहीं बनी है।

आर्थिक संकट और भविष्य का लक्ष्य

इराक ओपेक का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और इसके पांच संस्थापक सदस्यों में से एक है। वह लंबे समय से तर्क दे रहा है कि मौजूदा उत्पादन सीमाएं उसकी वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाती हैं। 2016 में ओपेक प्लस के गठन के बाद से ही इराक ने अक्सर ज्यादा कोटा की मांग की है। उसका कहना है कि दशकों के संघर्ष और प्रतिबंधों से प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए उसे तेल से अधिक कमाई की जरूरत है। इसके अलावा, अमेरिका-इरान युद्ध के कारण देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। ओपेक ने हाल ही में यूएई के हटने के बाद उत्पादन लक्ष्य 188000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने पर सहमति जताई थी, लेकिन यह इराक की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं था। सरकारी प्रवक्ता हैदर अल-अबूदी ने रॉयटर्स को बताया कि इराक का लक्ष्य आने वाले वर्षों में तेल उत्पादन को बढ़ाकर 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन करना है ताकि वह अपनी पूरी निर्यात क्षमता का लाभ उठा सके।

विज्ञापन