इजराइल चुनाव: दो बड़ी अरब पार्टियों पर लगा बैन, क्या नेतन्याहू की राह होगी आसान?

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इजराइल चुनाव: दो बड़ी अरब पार्टियों पर लगा बैन, क्या नेतन्याहू की राह होगी आसान?
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इजराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आगामी आम चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। देश की केंद्रीय चुनाव समिति ने दो प्रमुख अरब पार्टियों को चुनाव लड़ने से रोकने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली रा’म (Ra’am) पार्टी और जॉइंट लिस्ट को चुनावी दौड़ से बाहर करने के पक्ष में मतदान किया गया है और जॉइंट लिस्ट में हदाश, ताअल और बालद जैसी महत्वपूर्ण पार्टियां शामिल हैं। हालांकि, यह निर्णय अभी अंतिम नहीं माना जा रहा है क्योंकि प्रभावित पार्टियां इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार रखती हैं।

समिति का फैसला और व्यक्तिगत उम्मीदवार

23 सितंबर को हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में रा’म और जॉइंट लिस्ट के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। समिति ने न केवल पार्टियों बल्कि कुछ व्यक्तिगत उम्मीदवारों पर भी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है और इसमें हदाश के सांसद ओफर कासिफ और बालद के नेता सामी अबू शेहादेह का नाम प्रमुखता से शामिल है। इजराइली कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्तिगत उम्मीदवार को चुनाव से बाहर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी अनिवार्य होती है। इन मामलों पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है, जहां कोर्ट यह तय करेगा कि क्या इन उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतरने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।

कार्रवाई का कानूनी आधार

यह पूरी कार्रवाई इजराइल के 'बेसिक लॉ: द नेसेट' की धारा 7A के प्रावधानों के तहत की गई है। इस कानून के अंतर्गत किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से तब रोका जा सकता है जब वह इजराइल को एक यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता देने से इनकार करे और इसके अलावा, नस्लवाद को बढ़ावा देने या इजराइल के खिलाफ किसी दुश्मन देश या आतंकी संगठन के सशस्त्र संघर्ष का समर्थन करने पर भी अयोग्यता का प्रावधान है। रा’म पार्टी के खिलाफ याचिकाएं बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी, ओत्जमा येहुदित और एक अन्य संगठन द्वारा दायर की गई थीं। समिति में रा’म को बाहर करने के पक्ष में 18 वोट पड़े जबकि विरोध में केवल 5 वोट आए। इसी तरह, जॉइंट लिस्ट के खिलाफ भी लिकुड पार्टी ने ही मोर्चा खोला था। सामी अबू शेहादेह के मामले में 31-4 के अंतर से उन्हें बाहर करने का फैसला हुआ, जिसके लिए उनके द्वारा 8 अक्टूबर 2023 को लिखे गए एक लेख को आधार बनाया गया। हालांकि, अबू शेहादेह ने हिंसा या आतंकवाद के समर्थन के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

चुनाव पर संभावित असर और सर्वे के आंकड़े

इस फैसले का इजराइल के अरब मतदाताओं और चुनावी नतीजों पर गहरा असर पड़ सकता है। साल 2021 के चुनावों में रा’म पार्टी ने नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड की गठबंधन सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिससे नेतन्याहू के लगातार 12 साल के शासन का अंत हुआ था। वर्तमान स्थिति में लिकुड पार्टी ही इन अरब दलों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की मांग कर रही है और 22 सितंबर को चैनल 12 द्वारा जारी किए गए एक सर्वे के अनुसार, जॉइंट लिस्ट को 7 सीटें और रा’म को 5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। वहीं, नेतन्याहू के मौजूदा गठबंधन को 50 सीटें मिलने की बात कही गई थी। हालांकि, अरब पार्टियों की ये संभावित 12 सीटें सीधे तौर पर नेतन्याहू के विरोधियों के खाते में नहीं जातीं क्योंकि विपक्षी दलों के भीतर भी अरब समर्थन को लेकर काफी मतभेद हैं। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि क्या इन पार्टियों पर लगाए गए आरोप कानूनी मानकों पर खरे उतरते हैं।

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