इजराइल और हमास के बीच चल रही भीषण जंग ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में जान गंवाने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या 74,000 के पार हो गई है। रिपोर्टों में बताया गया है कि यह संघर्ष लगभग तीन साल से जारी है और इसने गाजा पट्टी में तबाही के गहरे निशान छोड़े हैं। हालांकि 10 अक्टूबर को एक युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया गया था, जिसने बड़े पैमाने पर लड़ाई को रोकने का काम किया है, लेकिन इसके बावजूद इजराइली हमले पूरी तरह नहीं थमे हैं। इजराइली सेना का कहना है कि ये हमले केवल उन धमकियों या हमलों का जवाब हैं जो उनकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।
मौतों और घायलों के डराने वाले आंकड़े
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को विस्तृत डेटा साझा करते हुए बताया कि फिलिस्तीनियों की मौत का कुल आंकड़ा अब बढ़कर 74,016 हो गया है। इसके अलावा, इस युद्ध में अब तक 175,068 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय, जो हमास के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा है, नियमित रूप से इन आंकड़ों का रिकॉर्ड रखता है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एजेंसियां और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन आमतौर पर इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानते हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मरने वालों में लगभग आधी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाता है। हालांकि, इन आंकड़ों में आम नागरिकों और लड़ाकों (मिलिटेंट्स) के बीच अलग से अंतर नहीं किया गया है।
युद्ध की शुरुआत और सीजफायर के बाद की स्थिति
इस युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी, जब हमास के नेतृत्व वाले लड़ाकों ने इजराइल पर अचानक हमला कर दिया था। उस हमले में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे। इसके अलावा, 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। 10 अक्टूबर को लागू हुए सीजफायर के बाद की स्थिति पर गौर करें तो मंत्रालय का दावा है कि इस अवधि के दौरान भी 1,145 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। वहीं, सीजफायर के बाद से अब तक सात इजराइली सैनिकों की भी मौत हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता वाले इस सीजफायर के अन्य पहलू फिलहाल रुके हुए नजर आ रहे हैं।
गाजा में नियंत्रण और पुनर्निर्माण की चुनौतियां
वर्तमान में इजराइली सेना गाजा के आधे से ज्यादा हिस्से पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है। युद्ध के इतने लंबे समय बाद भी हमास ने हथियार नहीं डाले हैं और क्षेत्र में किसी नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन नहीं हो सका है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि गाजा में पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्शन) का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, जिससे लाखों लोग बेघर और बेहाल हैं और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपना रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह से हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजराइली सेना पीछे नहीं हटेगी।
नेतन्याहू के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता
युद्ध के मैदान के साथ-साथ इजराइल के भीतर राजनीतिक मोर्चे पर भी हलचल तेज हो गई है। इजराइल की मुख्य यहूदी विपक्षी पार्टियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर अगले महीने होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों में नेतन्याहू के गठबंधन को हराने का संकल्प लिया है। 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद यह पहला चुनाव है, जिसे उन सुरक्षा नाकामियों पर एक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के रूप में देखा जा रहा है जिनकी वजह से हमास हमला करने में सफल रहा था। विपक्षी दलों की पहले अंदरूनी लड़ाई के लिए आलोचना होती रही है, लेकिन अब वे एकजुट होते दिख रहे हैं।
अगले महीने होने वाली नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा
नेतन्याहू को चुनौती देने के लिए विपक्षी खेमे के कई दिग्गज नेता एक साथ आए हैं। इस बैठक में पूर्व मिलिट्री चीफ गादी आइजेनकोट शामिल हुए, जिन्हें नेतन्याहू का मुख्य प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है और उनके साथ दो पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट और यायर लैपिड भी मौजूद थे, जो मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा सेंटर-लेफ्ट पार्टी के प्रमुख यायर गोलान और कट्टर विपक्षी पार्टी के नेता एविगडोर लिबरमैन ने भी इस गठबंधन को अपना समर्थन दिया है। इन नेताओं ने वादा किया है कि वे मतदान प्रतिशत बढ़ाने, फर्जी खबरों (फेक न्यूज) और बदनाम करने वाले अभियानों के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे और उन्होंने अगली सरकार के बुनियादी सिद्धांतों को तैयार करने पर भी सहमति जताई है। उनके संयुक्त बयान में कहा गया है कि ये चुनाव देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।