ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष को छह दिन बीत चुके हैं और इस तनाव का सीधा असर अब इजराइल की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। इजराइल के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, ईरान के साथ चल रहे हवाई युद्ध और सुरक्षा संबंधी कड़े प्रतिबंधों के कारण देश की अर्थव्यवस्था को हर हफ्ते 9 अरब शेकेल से अधिक का नुकसान हो रहा है। 93 अरब) बैठती है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वित्तीय घाटा और अधिक बढ़ सकता है, जिससे देश के बजटीय संतुलन पर गंभीर दबाव पड़ेगा।
आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिबंधों का व्यापक असर
इजराइल के होम फ्रंट कमांड ने सुरक्षा कारणों से देश के कई हिस्सों में कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों के तहत सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगा दी गई है और कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में केवल आवश्यक सेवाओं को ही संचालित करने की अनुमति है, जबकि अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं। स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से भी कार्यबल की उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि बड़ी संख्या में अभिभावकों को बच्चों की देखभाल के लिए घर पर रुकना पड़ रहा है। 4 अरब शेकेल प्रति सप्ताह तक पहुंच सकता है।
वित्त मंत्रालय की घाटा कम करने की रणनीति
बढ़ते आर्थिक नुकसान को देखते हुए इजराइल का वित्त मंत्रालय अब सुरक्षा प्रतिबंधों के स्तर को कम करने के लिए होम फ्रंट कमांड के साथ समन्वय कर रहा है। मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि प्रतिबंधों की श्रेणी को 'रेड' (अत्यधिक सख्त) से घटाकर 'ऑरेंज' (कम सख्त) किया जाए। यदि अगले 48 घंटों के भीतर यह बदलाव लागू होता है, तो कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कामकाज की स्थिति में सुधार हो सकता है। 3 अरब शेकेल रह सकता है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां वर्तमान युद्ध की स्थिति को देखते हुए किसी भी प्रकार की ढील देने से पहले जमीनी हकीकत का आकलन कर रही हैं।
सैन्य लामबंदी और श्रम बाजार की चुनौतियां
युद्ध के कारण इजराइल ने अपने रिजर्व सैनिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती की है। बड़ी संख्या में कामकाजी नागरिकों को सैन्य सेवाओं के लिए बुलाए जाने से श्रम बाजार में जनशक्ति की भारी कमी हो गई है। निर्माण, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में कामकाज की गति धीमी पड़ गई है। इसके अतिरिक्त, विदेशी श्रमिकों की कमी और सीमावर्ती क्षेत्रों में विस्थापन ने भी उत्पादन श्रृंखला को बाधित किया है और वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के मोर्चे पर खर्च में वृद्धि और राजस्व में कमी के कारण राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है, जिसे नियंत्रित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और विकास दर के अनुमान
इजराइल की अर्थव्यवस्था पहले से ही हमास के साथ चल रहे संघर्ष के कारण दबाव में थी। अक्टूबर 2023 से शुरू हुए उस संघर्ष के आर्थिक प्रभावों से देश अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि ईरान के साथ सीधा टकराव शुरू हो गया। 1% की वृद्धि दर्ज की गई थी। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि यदि 2026 तक युद्ध विराम होता है, तो विकास दर 5% से अधिक रह सकती है। हालांकि, ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता ने अब इन आर्थिक अनुमानों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। मंत्रालय अब युद्धकालीन बजट और संसाधनों के पुनर्वितरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।