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इजराइल का लेबनान में बड़ा सैन्य अभियान: लितानी नदी तक कब्जे की योजना

इजराइल का लेबनान में बड़ा सैन्य अभियान: लितानी नदी तक कब्जे की योजना
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इजराइल अब लेबनान में एक व्यापक जमीनी सैन्य अभियान शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इजराइली रक्षा बलों (IDF) की योजना दक्षिणी लेबनान के उस महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने की है जो लितानी नदी के दक्षिण में स्थित है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य वहां मौजूद हिज्बुल्लाह के सैन्य बुनियादी ढांचे, सुरंगों और हथियारों के जखीरे को पूरी तरह से समाप्त करना है। इजराइली और अमेरिकी अधिकारियों के बयानों के आधार पर यह माना जा रहा है कि यदि यह पूर्ण स्तर पर शुरू होता है, तो यह वर्ष 2006 के युद्ध के बाद लेबनान की धरती पर इजराइल का सबसे बड़ा सैन्य हस्तक्षेप होगा।

सैन्य रणनीति और गाजा मॉडल का कार्यान्वयन

इजराइल के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, लेबनान में अपनाई जाने वाली रणनीति काफी हद तक गाजा पट्टी में किए गए ऑपरेशनों के समान होगी। सेना उन सभी इमारतों और नागरिक ढांचों को लक्षित करने की योजना बना रही है, जिनका उपयोग हिज्बुल्लाह द्वारा हथियार छिपाने या हमलों की योजना बनाने के लिए किया जा रहा है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर इन ठिकानों को नष्ट किया जाएगा ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से इजराइल पर होने वाले खतरों को कम किया जा सके। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अभियान का विस्तार दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना की लंबी अवधि की तैनाती की ओर भी संकेत करता है, जिससे लेबनान सरकार के भीतर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

सीमा पर सैन्य तैनाती और रिजर्व फोर्स की लामबंदी

इजराइली सेना ने लेबनान के साथ लगती अपनी उत्तरी सीमा पर पहले ही तीन बख्तरबंद और पैदल सेना डिवीजनों को तैनात कर दिया है। पिछले दो हफ्तों के दौरान सीमा पार कुछ सीमित जमीनी घुसपैठ की गतिविधियां भी दर्ज की गई हैं। अब सेना ने इस मोर्चे पर अतिरिक्त सैनिकों को भेजने और रिजर्व फोर्स के जवानों को ड्यूटी पर बुलाने का औपचारिक निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि हिज्बुल्लाह को सीमा से पीछे धकेलना और गांवों में स्थापित उनके सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करना इजराइल की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हो गया है।

मानवीय संकट और विस्थापन के आंकड़े

इस बढ़ते सैन्य तनाव और हवाई हमलों के कारण दक्षिणी लेबनान में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 800000 लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर हुए हैं। इस संघर्ष में अब तक कम से कम 773 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल हैं। लेबनान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है, क्योंकि युद्ध की तीव्रता बढ़ने से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

अमेरिकी रुख और कूटनीतिक मध्यस्थता के प्रयास

अमेरिकी प्रशासन हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के इजराइल के प्रयासों का समर्थन कर रहा है, हालांकि उसने कुछ शर्तें भी रखी हैं। अमेरिका ने इजराइल से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बेरुत-रफिक हरीरी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संपत्तियों को निशाना न बनाए। इजराइल ने हवाई अड्डे की सुरक्षा पर सहमति जताई है, लेकिन अन्य सरकारी ढांचों के संबंध में कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है और इस बीच, पूर्व मंत्री रॉन डर्मर और अमेरिकी प्रतिनिधि मसाद बोलोस के माध्यम से कूटनीतिक बातचीत के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। लेबनान सरकार ने बिना किसी पूर्व शर्त के युद्धविराम पर चर्चा करने के संकेत दिए हैं ताकि 1948 से चली आ रही युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त किया जा सके।

हिज्बुल्लाह की प्रतिक्रिया और प्रतिरोध की चेतावनी

हिज्बुल्लाह के नेतृत्व ने इजराइल की इन तैयारियों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन के नेता नईम कासिम ने कहा है कि कूटनीतिक प्रयास देश की संप्रभुता की रक्षा करने में विफल रहे हैं, इसलिए अब सैन्य प्रतिरोध ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इजराइली सेना जमीनी स्तर पर लेबनान में प्रवेश करती है, तो उसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। हिज्बुल्लाह का दावा है कि नजदीकी लड़ाई में उनके लड़ाके इजराइली सेना को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं।

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