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जयप्रकाश एसोसिएट्स के शेयर होंगे डीलिस्ट, 6 लाख निवेशकों का पैसा हुआ जीरो

जयप्रकाश एसोसिएट्स के शेयर होंगे डीलिस्ट, 6 लाख निवेशकों का पैसा हुआ जीरो
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शेयर बाजार के करीब 6 लाख छोटे निवेशकों को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। भारी कर्ज में डूबी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) के शेयर गुरुवार, 18 जून से हमेशा के लिए बाजार से बाहर यानी डीलिस्ट होने जा रहे हैं। हालांकि अडानी ग्रुप ने इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया है, लेकिन इस प्रक्रिया में आम शेयरधारकों के शेयरों की वैल्यू अब जीरो हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि इन निवेशकों द्वारा लगाई गई पूरी पूंजी अब डूब गई है और उन्हें अपनी होल्डिंग के बदले कुछ भी हासिल नहीं होगा।

डीलिस्टिंग की आधिकारिक पुष्टि

जयप्रकाश एसोसिएट्स के शेयर गुरुवार, 18 जून को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से हमेशा के लिए विदा हो जाएंगे। सोमवार को जारी एक आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से कंपनी ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि उसे डीलिस्टिंग के लिए अंतिम मंजूरी मिल गई है और कंपनी ने एक्सचेंजों के साथ अपने अब तक के सफर और सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया है। इस पूरी कानूनी और व्यापारिक प्रक्रिया में सबसे अधिक नुकसान उन 6 लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों को हुआ है, जिन्हें अपने निवेश किए गए शेयरों के बदले एक भी रुपया वापस नहीं मिलेगा।

शेयरों की कीमत शून्य होने का कारण

जयप्रकाश एसोसिएट्स ने पहले ही शेयर बाजार को यह स्पष्ट कर दिया था कि नई समाधान योजना (रेजोल्यूशन प्लान) के तहत मौजूदा निवेशकों को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी की वित्तीय स्थिति इतनी अधिक खराब हो चुकी थी कि उसकी संपत्तियों की कुल लिक्विडेशन वैल्यू से सुरक्षित कर्जदाताओं (Secured Creditors) का पूरा बकाया चुकाना भी मुमकिन नहीं था। शेयर बाजार और दिवाला कानून के नियमों के अनुसार, किसी भी कंपनी के बंद होने या बिकने पर सबसे पहले बैंकों और सुरक्षित लेनदारों का पैसा चुकाया जाता है। जब उनके लिए ही रकम पर्याप्त नहीं थी, तो आम शेयरधारकों के लिए कुछ भी शेष नहीं बचा। इसी कारण से मौजूदा शेयर होल्डिंग स्ट्रक्चर को पूरी तरह खत्म किया जा रहा है और निवेशकों के लिए एग्जिट प्राइस शून्य तय किया गया है।

6 लाख से अधिक निवेशकों पर असर

अगर 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी में कुल 6 लाख 48 हजार शेयरधारक थे। इनमें से 6 लाख 40 हजार तो सिर्फ छोटे खुदरा निवेशक थे, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इस कंपनी में लगाई थी। कंपनी में इन छोटे निवेशकों की कुल हिस्सेदारी 45 प्रतिशत थी। इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक के पास भी कंपनी के 8 प्रतिशत शेयर थे। अब यह पूरी हिस्सेदारी खत्म हो जाएगी और निवेशकों का निवेश पूरी तरह शून्य हो जाएगा।

अडानी ग्रुप का अधिग्रहण और बैंकों को भुगतान

जयप्रकाश एसोसिएट्स का यह मामला भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले दिवाला मुकदमों में से एक माना जाता है। इस संकटग्रस्त कंपनी की कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) जून 2024 में शुरू की गई थी। कई दौर की कानूनी प्रक्रियाओं के बाद, इस साल 17 मार्च को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद बेंच ने अडानी एंटरप्राइजेज की 14535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इस बड़े अधिग्रहण के माध्यम से जेपी ग्रीन्स और जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी जैसे महत्वपूर्ण रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स अब अडानी ग्रुप के नियंत्रण में आ गए हैं और मई के अंत में अडानी ग्रुप ने इस योजना के तहत अपनी पहली किस्त के रूप में 6000 करोड़ रुपये का बड़ा भुगतान बैंकों को कर दिया है।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सौदे

इस पूरी समाधान योजना में केवल रियल एस्टेट ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े बदलाव हुए हैं और अडानी पावर ने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (JPVL) में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के लिए पक्के समझौते किए हैं। यह सौदा लगभग 2994 करोड़ रुपये में तय हुआ है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के चूर्क में स्थित 180 मेगावाट क्षमता वाले थर्मल पावर प्लांट को भी अडानी ग्रुप 1200 करोड़ रुपये में खरीद रहा है। इन सौदों से जेपी ग्रुप की संपत्तियों का मालिकाना हक अब अडानी ग्रुप के पास चला गया है।

निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक

इन सभी बड़े व्यापारिक घटनाक्रमों के बीच, जेपी एसोसिएट्स के शेयरों की ट्रेडिंग फिलहाल रोक दी गई है। 18 जून को जब ये शेयर स्टॉक एक्सचेंज से हमेशा के लिए हट जाएंगे, तो यह उन लाखों निवेशकों के लिए एक कड़वा अनुभव होगा। बाजार में निवेश करने वालों के लिए यह मामला एक सीधा सबक है कि अत्यधिक कर्ज में डूबी कंपनियों में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है और इससे पूरी जमापूंजी जीरो हो सकती है।

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