जयपुर में नकली घी की पैकिंग सामग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मुख्य सरगना समेत तीन गिरफ्तार

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जयपुर में नकली घी की पैकिंग सामग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मुख्य सरगना समेत तीन गिरफ्तार
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली घी के कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित एक गोदाम में बड़े पैमाने पर नामी घी कंपनियों की नकली पैकिंग सामग्री छापी जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में मुख्य सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और भारी मात्रा में तैयार पैकिंग सामग्री और प्रिंटिंग के काम आने वाले आधुनिक उपकरण जब्त किए हैं। यह कार्रवाई जयपुर पुलिस की कमिश्नरेट स्पेशल टीम (सीएसटी) और झोटवाड़ा थाना पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से अंजाम दी गई है।

पुलिस की छापेमारी और गिरफ्तारियां

जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि झोटवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में नकली घी की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के अवैध निर्माण की सूचना मिली थी। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चाकसू (जयपुर) निवासी अनिल अग्रवाल, मोहन लाल शर्मा और जयपुर में नीलगर मस्जिद के पास रहने वाले याकूब को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस टीम का नेतृत्व झोटवाड़ा थानाधिकारी रायसल सिंह कर रहे थे।

भारी मात्रा में अवैध सामग्री और मशीनें जब्त

गोदाम पर दी गई दबिश के दौरान पुलिस को वहां से भारी मात्रा में नकली पैकिंग सामग्री मिली और पुलिस ने मौके से 61,600 खाली मोनो कार्टन, 61,600 पॉली पैक और 61,600 बारकोड स्कैनर बरामद किए हैं। इसके अलावा, प्रिंटिंग और पैकिंग के काम में आने वाली मशीनों को भी जब्त किया गया है, जिनमें एक इलेक्ट्रिक मशीन, एक प्रिंटर (कन्वेयर), एक इलेक्ट्रिक कांटा और एक सिलाई मशीन शामिल है। पुलिस ने अवैध सामग्री की सप्लाई में इस्तेमाल होने वाली एक कार और एक लोडिंग टेंपो को भी अपने कब्जे में ले लिया है।

सरस डेयरी के अधिकारियों ने की पुष्टि

छापेमारी के दौरान मिली सामग्री की सत्यता जांचने के लिए पुलिस ने सरस डेयरी के अधिकारियों को मौके पर बुलाया। सरस डेयरी के अधिकारी राजाराम और उनकी टीम ने जब इन सामग्रियों की जांच की, तो पाया कि ये सभी नामी ब्रांडों के नकली रैपर और कार्टन थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर झोटवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), कॉपीराइट अधिनियम और ट्रेडमार्क अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

कैसे चलता था यह अवैध कारोबार

अब तक की पुलिस पूछताछ और पड़ताल में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपी अनिल अग्रवाल टोंक जिले के निवाई निवासी अमन जैन से खाली रैपर और मोनो कार्टन खरीदकर लाता था और इसके बाद जयपुर स्थित इस गोदाम में प्रिंटिंग मशीनों की मदद से उन पर नामी ब्रांडों के लोगो, मार्का, पैकिंग की तारीख और फर्जी हॉलमार्क अंकित किए जाते थे। तैयार सामग्री को छोटे व्यापारियों को सप्लाई किया जाता था, जो इसका उपयोग नकली घी की पैकिंग के लिए करते थे। इस मामले में प्रमोद अग्रवाल और श्याम सुंदर राठौड़ के नाम भी सामने आए हैं, जो कथित तौर पर नकली घी बनाने का काम करते हैं। आरोपी पुलिस से बचने के लिए कोडवर्ड में ऑर्डर लेते थे और अलग-अलग वाहनों और रास्तों का उपयोग कर सप्लाई देते थे।

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