भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर आया बड़ा बयान, मार्को रुबियो ने खोले कई राज

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भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर आया बड़ा बयान, मार्को रुबियो ने खोले कई राज
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भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नया आयाम देने की दिशा में एक अहम मुलाकात सामने आई है। दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा यानी एनर्जी सिक्योरिटी, रक्षा सहयोग और अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विभिन्न भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर मीडिया के सामने खुलकर अपने विचार रखे, जिसमें ट्रेड डील से लेकर वेनेजुएला के तेल और यूक्रेन युद्ध तक के विषय शामिल थे।

भारत यात्रा के दौरान अपने आधिकारिक कार्यक्रमों और मुलाकातों के संबंध में बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत के साथ संबंधों का दायरा कितना व्यापक है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि सबसे पहले उन्हें यह बताना चाहिए कि भारत के विदेश मंत्री इस साल चार बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने भारत के वैश्विक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और साथ ही यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। इसके अलावा, भारत अमेरिका का एक बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक और व्यावसायिक साझेदार है। दोनों देश रक्षा क्षेत्र में भी काफी सहयोग करते हैं और भारत क्वाड का एक प्रमुख सदस्य होने के साथ-साथ अमेरिका का एक मजबूत रणनीतिक साझेदार भी है। भारत के साथ अपने कूटनीतिक जुड़ाव को और प्रगाढ़ करने की इच्छा जताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि उन्होंने पर्याप्त दौरे नहीं किए हैं और उन्हें तथा दोनों देशों को और अधिक दौरे करने चाहिए ताकि आपसी सहयोग को और गति मिल सके।

मुंबई में एस. जयशंकर से मुलाकात के बाद जब पत्रकारों ने उनसे बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील के बारे में सवाल पूछा, तो अमेरिकी विदेश मंत्री ने बहुत ही सकारात्मक और आश्वस्त करने वाला जवाब दिया। ट्रेड डील पर बात करते हुए मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि हालांकि विदेश विभाग सीधे तौर पर व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करता है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में वे पूरी तरह से शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि उनके समकक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वे खुद इस मामले को लेकर बहुत चिंतित हैं और इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। ट्रेड डील की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे इसके बेहद करीब हैं और उन्हें लगता है कि अब केवल कुछ ही चीजें बाकी हैं जिन्हें अंतिम रूप देना है। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह समझौता जल्द ही हो जाएगा। अमेरिका और भारत की तरफ से आशा जताई जा रही है और ऐसा होना भी चाहिए कि वे जल्द ही कुछ अच्छी खबर की घोषणा करेंगे और उसके बाद इस महत्वपूर्ण समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे और उन्होंने यह भी दोहराया कि वे इस पूरे मामले को लेकर बहुत अधिक आशावादी हैं कि बहुत जल्द वे इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने में सफल होंगे।

ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के संदर्भ में भारत की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए मार्को रुबियो ने मुंबई की बैठक के बाद एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत रिफाइनिंग के मामले में दुनिया भर में एक महाशक्ति है और उनके पास भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने की असाधारण क्षमता मौजूद है। उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भारत ने पहले भी ऐसा करके दिखाया है और उन्हें पूरा विश्वास है कि जैसे-जैसे वेनेजुएला से और अधिक तेल उपलब्ध होगा, भारत वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करने में एक बेहद अहम और निर्णायक भूमिका निभा सकता है। मार्को रुबियो ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वेनेजुएला में भारत के पास पहले से ही तेल रियायतें मौजूद हैं, जिनके जरिए वे खुद और अधिक उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने इसे एक सकारात्मक बात बताते हुए स्पष्ट किया कि वे यह दावा बिल्कुल नहीं कर रहे हैं कि दुनिया भर में हो रही घटनाओं की वजह से ऊर्जा की जो कमी पैदा हो रही है, उसे अकेले वेनेजुएला पूरा कर सकता है। हालांकि, उनका मानना था कि समय के साथ ऐसा निश्चित रूप से हो सकता है और कम से कम अल्पावधि में तो यह वेनेजुएला का तेल और भारत की रिफाइनिंग क्षमता निश्चित रूप से मदद कर सकती है। उन्होंने यह भी साझा किया कि भारत के साथ इस विषय पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है और भारतीय पक्ष पूरी तरह से तैयार दिखता है। भारत ऐसा करने का पूरी तरह से इच्छुक भी है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रतिबंधों और अन्य कूटनीतिक नियमों के रूप में कुछ रुकावटें या बाधाएं सामने आ सकती हैं, जिन्हें दोनों देशों को मिलकर आपस में सुलझाना होगा।

मुंबई में पत्रकारों के साथ अपनी इस बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का भी विशेष रूप से जिक्र किया। अपनी इस चर्चा में उन्होंने यूक्रेन युद्ध से जुड़े कई पहलुओं पर अमेरिका का पक्ष रखा और कुछ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी दिए। रुबियो ने पूरी तरह से स्पष्ट किया कि यूक्रेन को जानबूझकर किसी भी प्रकार की आवश्यक सैन्य सहायता या सामग्री से वंचित नहीं किया जा रहा है। उनका यह स्पष्टीकरण उन मीडिया रिपोर्टों और अटकलों के बाद सामने आया था, जिनमें यह दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने उन देशों से यूक्रेन को पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के हस्तांतरण को अपनी मंजूरी नहीं दी है, जिन्होंने पहले ही अमेरिकी निर्मित हथियार और रक्षा उपकरण हासिल कर लिए हैं और इन तमाम दाบों और चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने के आरोपों से बेहद निराश महसूस कर रहा है। कुल मिलाकर, मार्को रुबियो का यह दो दिवसीय भारत दौरा और विदेश मंत्री एस और जयशंकर के साथ हुई उनकी यह उच्च स्तरीय बैठक आने वाले समय में भारत-अमेरिका के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूत तथा प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम साबित होने जा रही है।

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