भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से हॉस्पिटल सेक्टर के शेयरों में काफी हलचल और उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस उथल-पुथल की मुख्य वजह केंद्र सरकार का वह सख्त रुख है, जो दवाओं और मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सामने आया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं पर वसूले जा रहे भारी मुनाफे पर कड़ी आपत्ति जताई थी। इन खबरों के चलते निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना और अपोलो व मैक्स जैसे दिग्गज अस्पतालों के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और हालांकि, इस गिरावट के बीच विदेशी ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने सकारात्मक रुख अपनाया है। जेफरीज का मानना है कि इन कंपनियों के बुनियादी आधार यानी फंडामेंटल्स काफी मजबूत हैं और यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक सुनहरा मौका हो सकती है।
दवाओं और उपकरणों की कीमतों पर बढ़ती सख्ती
सरकार वर्तमान में मेडिकल उपकरणों और जीवन रक्षक दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को तर्कसंगत बनाने की योजना पर काम कर रही है। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले सिरिंज, आईवी सेट, कार्डियक कैथेटर और पेसमेकर जैसी आवश्यक चीजों की खरीद कीमत और उनकी एमआरपी के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। कई मामलों में एमआरपी खरीद कीमत से 10 से 20 गुना तक ज्यादा पाई गई। इसी तरह, सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान कैंसर की एक दवा की कीमत पर हैरानी जताई थी।
अदालत ने पाया कि जिस दवा की खरीद लागत मात्र 2700 रुपये है, उसे मरीजों को 27000 रुपये की एमआरपी पर बेचा जा रहा है। इस भारी अंतर को देखते हुए कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इन पर 16 फीसदी का एक समान मार्जिन कैप लगाया जाना चाहिए। इन्हीं नियामक चिंताओं और संभावित पाबंदियों के डर से निवेशकों ने हॉस्पिटल शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी, जिससे बाजार में इन शेयरों की कीमतों में गिरावट आई।
जेफरीज की पसंद के 6 प्रमुख शेयर
बाजार की इस अस्थिरता के बावजूद जेफरीज ने 6 बड़े हॉस्पिटल शेयरों पर अपना भरोसा जताया है और उन्हें 'बाय' (Buy) रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने इन शेयरों के लिए भविष्य के लक्ष्य यानी टारगेट प्राइस भी तय किए हैं। जेफरीज की इस लिस्ट में फोर्टिस हेल्थकेयर शामिल है, जिसके लिए 1125 रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा डॉ अग्रवाल हेल्थकेयर के लिए 600 रुपये और मणिपाल के लिए 870 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया गया है।
ब्रोकरेज ने मैक्स हेल्थकेयर के लिए 1260 रुपये का लक्ष्य दिया है, जबकि अपोलो हॉस्पिटल्स के लिए 10350 रुपये का बड़ा टारगेट रखा गया है। मेदांता (ग्लोबल हेल्थ) को भी इस सूची में स्थान मिला है और इसके लिए 1660 रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जेफरीज का मानना है कि इन अस्पतालों की बाजार में पकड़ और उनकी सेवा क्षमता उन्हें किसी भी अस्थायी नियामक बदलाव से उबरने में मदद करेगी।
वित्तीय प्रभाव और रिकवरी की संभावना
जेफरीज के विश्लेषण के अनुसार, यदि सरकार दवाओं और उपकरणों पर मार्जिन कैप लागू करती है, तो अस्पतालों के कुल राजस्व पर इसका प्रभाव पड़ना निश्चित है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि इससे अस्पतालों के एबिटा (EBITDA) में 2 से 5 फीसदी तक की कमी आ सकती है। हालांकि, जेफरीज का यह भी कहना है कि अस्पतालों के पास इस तरह के वित्तीय नुकसान की भरपाई करने का पुराना अनुभव और प्रभावी रणनीतियां मौजूद हैं।
इतिहास की बात करें तो लगभग एक दशक पहले जब सरकार ने हार्ट स्टेंट और अन्य मेडिकल उपकरणों की कीमतों में 70 से 85 फीसदी तक की भारी कटौती की थी, तब भी अस्पतालों ने सफलतापूर्वक वापसी की थी। उस समय अस्पतालों ने अगले 12 से 15 महीनों के दौरान इलाज के अन्य शुल्कों और सेवाओं की कीमतों में धीरे-धीरे बदलाव करके अपने मुनाफे को संतुलित कर लिया था। अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों ने तो कुछ ही तिमाहियों में अपना मुनाफा फिर से पुराने स्तर पर पहुंचा दिया था और जेफरीज को उम्मीद है कि इस बार भी अस्पताल प्रबंधन इसी तरह की रणनीति अपनाकर अपने मार्जिन को सुरक्षित रख पाएंगे।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और यह सेक्टर काफी मजबूत स्थिति में है। हालिया गिरावट के कारण इन शेयरों का वैल्युएशन अब काफी आकर्षक हो गया है। पहले ये शेयर 25 से 35 गुना के वैल्युएशन पर कारोबार कर रहे थे, जो अब घटकर 20 से 27 गुना (FY28 EV/EBITDA) के स्तर पर आ गए हैं।
पिछले अनुभवों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जब भी इस तरह की नियामक पाबंदियां या सरकारी हस्तक्षेप हुआ है, हॉस्पिटल शेयरों ने 3 से 6 महीने के भीतर शानदार वापसी की है। इसलिए, जो निवेशक लंबी अवधि के लिए बाजार में बने रहना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक बेहतरीन एंट्री पॉइंट साबित हो सकती है। जेफरीज के अनुसार, सेक्टर की मजबूत डिमांड और कंपनियों की कार्यकुशलता को देखते हुए इन शेयरों में निवेश करना मुनाफे का सौदा हो सकता है।