मुकेश अंबानी की प्रमुख कंपनी रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स का मेगा आईपीओ बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरधारकों के पास 2,500 करोड़ रुपये के विशेष शेयरहोल्डर रिजर्वेशन यानी आरक्षण के जरिए शेयर पाने का एक शानदार और अतिरिक्त मौका है। भारत के अब तक के सबसे बड़े पब्लिक ऑफरिंग में भारी मांग की उम्मीद जताई जा रही है, इसलिए पात्र निवेशक शेयरधारक और रिटेल दोनों ही कैटेगरीज में आवेदन करके शेयर मिलने की अपनी संभावनाओं को काफी हद तक बेहतर बना सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए हैं, जिससे उन्हें एक अलग अलॉटमेंट पूल में शामिल होने का अनूठा अवसर मिलता है। इसके चलते उन्हें केवल अन्य सामान्य रिटेल निवेशकों के साथ ही सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ेगी।
30,213 करोड़ रुपये के आईपीओ का विशाल आकार और एंकर बुक की जबरदस्त मांग
कुल 30,213 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम आईपीओ से पहले, शेयरधारक आरक्षण को लेकर बाजार में जबरदस्त चर्चा और उत्साह देखा जा रहा है। 5 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम बोलियां प्राप्त हुई हैं। हालांकि, केवल पात्र होना ही इस बात की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं है कि आपको शेयर मिल ही जाएंगे। किसी भी निवेशक को अंततः कितने शेयर आवंटित होंगे, यह शेयरधारक कैटेगरी में आने वाली कुल मांग और अलॉटमेंट के अंतिम आधार पर पूरी तरह निर्भर करेगा। इस पब्लिक ऑफर में कुल 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर शामिल हैं, जिससे प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर 30,213 करोड़ रुपये तक की भारी राशि जुटाई जा सकती है। इस निर्धारित कीमत के आधार पर, जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल वैल्यूएशन लगभग 10 लाख 30 हजार करोड़ रुपये आंका गया है। कंपनी इस आईपीओ से मिलने वाली कुल राशि में से लगभग 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को पूरी तरह चुकाने या फिर समय से पहले भुगतान करने के लिए करेगी, जबकि बची हुई शेष राशि का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों के संचालन में किया जाएगा।
कौन है जियो आईपीओ के शेयरधारक कोटे के लिए पात्र? जानिए कट-ऑफ तारीख का गणित
वे सभी व्यक्तिगत निवेशक यानी इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स और हिंदू अविभाजित परिवार जिनके पास 14 अक्टूबर 2026 तक रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर थे, वे इस शेयरहोल्डर रिजर्वेशन के तहत आवेदन करने के लिए पूरी तरह पात्र माने जाएंगे। कंपनी ने 14 अक्टूबर को, जो कि इसके रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी RHP के जारी होने की आधिकारिक तारीख है, पात्रता के लिए कट-ऑफ तारीख के रूप में तय किया है। इस तय तारीख पर रिलायंस इंडस्ट्रीज का केवल एक भी शेयर अपने डीमैट खाते में रखने वाला निवेशक भी इस विशेष आरक्षण के लिए पूरी तरह पात्र है और हालांकि, जिन निवेशकों ने 14 अक्टूबर या उसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर खरीदे हैं, वे इस विशेष कोटे के लिए बिल्कुल पात्र नहीं होंगे। भारत के T+1 सेटलमेंट सिस्टम के मौजूदा नियमों के अनुसार, इस पात्रता को हासिल करने के लिए रिलायंस के शेयर खरीदने का आखिरी रेगुलर ट्रेडिंग दिन 13 अक्टूबर 2026 था। जो लोग इस डेडलाइन से चूक गए हैं, वे भी लागू होने वाली सभी शर्तों के अधीन, सामान्य रिटेल कैटेगरी के तहत जियो आईपीओ के लिए आवेदन करने का विकल्प चुन सकते हैं।
शेयरधारक अपने अलॉटमेंट के मौकों और संभावनाओं को कैसे बेहतर बना सकते हैं?
अलॉटमेंट के अवसरों को अधिक से अधिक मजबूत करने के लिए, निवेशक शेयरधारक और रिटेल दोनों ही कैटेगरीज के तहत एक साथ आवेदन कर सकते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों को यह सबसे बड़ा फायदा मिलता है कि वे अपने एक ही पैन यानी PAN का उपयोग करके दो अलग-अलग आईपीओ आवेदन जमा कर सकते हैं। एक पात्र निवेशक शेयरधारक आरक्षण के तहत एक बार और सामान्य रिटेल कैटेगरी के तहत एक बार आवेदन प्रस्तुत कर सकता है और एक ही कैटेगरी के भीतर अगर कोई व्यक्ति डुप्लीकेट आवेदन जमा करता है, तो उसके आवेदन खारिज किए जा सकते हैं, लेकिन जियो के आधिकारिक ऑफर दस्तावेजों के अनुसार इन दो अलग-अलग कैटेगरीज के तहत अलग-अलग आवेदन करने की पूरी अनुमति दी गई है। इससे निवेशकों को दो अलग-अलग अलॉटमेंट पूल तक सीधी पहुंच मिलती है, जिससे उन्हें शेयर मिलने की कुल संभावना काफी हद तक बेहतर हो जाती है। उदाहरण के लिए, कोई भी निवेशक शेयरधारक कैटेगरी के तहत एक लॉट और रिटेल कैटेगरी के तहत एक और लॉट के लिए आसानी से आवेदन कर सकता है और इन दोनों आवेदनों पर पूरी तरह से अलग-अलग विचार किया जाएगा, और अलॉटमेंट इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रत्येक कैटेगरी में कुल कितनी मांग दर्ज की गई है।
शेयरधारक कोटे के तहत आवेदन का आकार और आनुपातिक आवंटन तंत्र
पात्र रिलायंस शेयरधारक इस रिजर्व कैटेगरी के तहत 2 लाख रुपये तक के शेयरों के लिए बड़े आराम से आवेदन कर सकते हैं। जियो के इस आईपीओ के लिए न्यूनतम आवेदन साइज 12 शेयरों का तय किया गया है, जिसकी कीमत 1,119 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर 13 हजार 428 रुपये बैठती है। निवेशक 12 शेयरों के मल्टीपल में ही आवेदन कर सकते हैं। अधिकतम कीमत यानी कैप प्राइस पर, एक शेयरधारक 14 लॉट तक के लिए अपनी बोली लगा सकता है, जिसमें कुल 168 शेयर शामिल होंगे और इसके लिए 1 लाख 87 हजार रुपये की आवश्यकता होगी। सामान्य रिटेल कैटेगरी के ठीक विपरीत, जहां बहुत अधिक ओवरसब्सक्राइब होने वाले इश्यू में आमतौर पर एक ड्रॉ के जरिए न्यूनतम लॉट का ही आवंटन किया जाता है, शेयरधारक रिजर्व कोटे में आनुपातिक आवंटन यानी प्रोपोर्शनल अलॉटमेंट तंत्र का सख्ती से पालन किया जाता है और यह पूरी प्रक्रिया न्यूनतम लॉट और शेयरों की वास्तविक उपलब्धता पर निर्भर करती है। परिणामस्वरूप, अधिक संख्या में शेयरों के लिए आवेदन करने पर आनुपातिक तंत्र के तहत निवेशक को मिलने वाले शेयरों की संख्या बढ़ सकती है और हालांकि, अधिकतम अनुमत मात्रा के लिए बोली लगाने से भी शत-प्रतिशत अलॉटमेंट की कोई गारंटी नहीं मिलती है, खासकर तब जब उस विशेष कैटेगरी में भारी-भरकम ओवरसब्सक्रिप्शन देखने को मिले। इसके अलावा, जिन परिवारों में एक से अधिक सदस्य शेयरधारक आरक्षण के लिए अलग-अलग पात्र हैं, वे अपने-अपने अलग डीमैट खातों के माध्यम से आवेदन करने पर विचार कर सकते हैं। लागू नियमों के अधीन, प्रत्येक पात्र निवेशक एक अलग रिटेल आवेदन भी अपनी तरफ से जमा कर सकता है। हालांकि, ये आवेदन वास्तविक और पूरी तरह स्वतंत्र रूप से पात्र निवेशकों के ही होने चाहिए क्योंकि एक ही कैटेगरी में एक ही पैन के तहत दिए गए कई आवेदनों को डुप्लीकेट मान लिया जाएगा।
जियो आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP, प्राइस बैंड और महत्वपूर्ण तिथियां
आईपीओ के आधिकारिक रूप से खुलने से पहले, 21 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग 273 रुपये के आसपास देखा जा रहा है। 40 प्रतिशत का एक अनौपचारिक प्रीमियम है। इस शानदार प्रीमियम के हिसाब से, शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत लगभग 1,392 रुपये प्रति शेयर के आसपास बैठती है। हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि ग्रे मार्केट की कीमतें पूरी तरह से अनौपचारिक होती हैं, जो बाजार की मांग के अनुसार लगातार बदलती रहती हैं और इनसे किसी भी प्रकार के वास्तविक लिस्टिंग लाभ की कोई पक्की गारंटी नहीं मिलती है। जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने इस मेगा आईपीओ के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह बहुप्रतीक्षित पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर 2026 को बंद हो जाएगा। शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर 2026 को फाइनल होने की पूरी उम्मीद है, जबकि शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर आधिकारिक तौर पर लिस्ट किए जाएंगे। शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के इस विशेष आरक्षण के अलावा, जियो ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए भी 500 करोड़ रुपये की राशि अलग से सुरक्षित रखी है, और इन पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की विशेष छूट यानी डिस्काउंट का लाभ मिलेगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए, दोनों अनुमत श्रेणियों के माध्यम से आवेदन करने पर शेयर पाने का एक बहुत ही सुनहरा और अतिरिक्त अवसर मिल सकता है, हालांकि अलॉटमेंट की वास्तविक संभावना अंततः सब्सक्रिप्शन की मांग और अंतिम अलॉटमेंट प्रक्रिया पर ही निर्भर करेगी।