राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की रिमांड पर चल रहे रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मंगलवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अग्रवाल ने बेचैनी और अस्वस्थता की शिकायत की, जिसके बाद जांच एजेंसी ने तत्काल उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। सुबोध अग्रवाल वर्तमान में 15 अप्रैल तक एसीबी की रिमांड पर हैं और उनसे घोटाले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन पूछताछ की जा रही है।
दो प्रमुख अस्पतालों में करवाया गया मेडिकल परीक्षण
तबीयत बिगड़ने की शिकायत मिलने के तुरंत बाद एसीबी की टीम सुबोध अग्रवाल को लेकर जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल पहुंची। वहां प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें जयपुरिया अस्पताल भी ले जाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, दो अलग-अलग अस्पतालों में मेडिकल परीक्षण करवाने का उद्देश्य स्वास्थ्य स्थिति की पूरी तरह पुष्टि करना था। अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों ही चिकित्सा केंद्रों में किए गए परीक्षणों की रिपोर्ट सामान्य आई है और मेडिकल जांच के बाद उन्हें वापस एसीबी मुख्यालय लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की प्रक्रिया पुनः शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान बेचैनी की शिकायत
एसीबी की टीम मंगलवार, 14 अप्रैल को सुबोध अग्रवाल से जल जीवन मिशन में हुई वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल-जवाब कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने शारीरिक असहजता और घबराहट की बात कही। गौरतलब है कि कोर्ट के आदेश के बाद अग्रवाल को दो दिन की अतिरिक्त रिमांड पर भेजा गया है। एसीबी इस समय सीमा के भीतर घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों और लेनदेन के साक्ष्यों का मिलान करने का प्रयास कर रही है। रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें पुनः न्यायालय में पेश किया जाएगा।
सुबोध अग्रवाल का पक्ष और सुधांश पंत का जिक्र
पूछताछ के दौरान सुबोध अग्रवाल ने जांच की दिशा पर सवाल उठाते हुए अपना पक्ष रखा है। उन्होंने दावा किया है कि फाइनेंस कमेटी के सामने आए कुल 37 प्रकरणों में से केवल 4 उनके कार्यकाल से संबंधित हैं। अग्रवाल के अनुसार, शेष 33 प्रकरण सुधांश पंत के कार्यकाल के हैं, जिनमें लगभग ₹600 करोड़ का मामला शामिल है। उन्होंने एसीबी के समक्ष तर्क दिया कि जांच उन मामलों पर केंद्रित की जा रही है जिनमें भुगतान नहीं हुआ है, जबकि उन प्रकरणों की गहन जांच होनी चाहिए जहां पैसा देकर गबन किया गया है।
₹600 करोड़ के गबन और भ्रष्टाचार की जांच
जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है। इसमें केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाने के कार्यों में भारी अनियमितताओं के आरोप हैं। एसीबी की जांच मुख्य रूप से निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी, घटिया सामग्री का उपयोग और फर्जी बिलों के माध्यम से करोड़ों रुपये के भुगतान पर केंद्रित है। सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी और उनके द्वारा अन्य अधिकारियों के नाम लिए जाने के बाद इस मामले में जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रिमांड अवधि और आगामी कानूनी कार्रवाई
सुबोध अग्रवाल की रिमांड 15 अप्रैल तक प्रभावी है। एसीबी के अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि घोटाले की कड़ियों को जोड़ा जा सके और इसमें शामिल अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सके। रिमांड खत्म होने पर एसीबी कोर्ट को अब तक की प्रगति की जानकारी देगी, जिसके आधार पर आगे की न्यायिक हिरासत या रिमांड विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा।