कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे: 4700 करोड़ का प्रोजेक्ट उद्घाटन के 13 दिन बाद धंसा

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कानपुर लखनऊ एक्सप्रेसवे: 4700 करोड़ का प्रोजेक्ट उद्घाटन के 13 दिन बाद धंसा
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उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां भारी बारिश के चलते 4700 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे अपनी मजबूती की परीक्षा में विफल साबित हुआ है। इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुए अभी महज 13 दिन ही बीते थे कि सड़क के धंसने और उसमें दरारें आने की खबरें सामने आने लगीं। इस घटना ने न केवल यात्रियों की सुरक्षा पर चिंता पैदा कर दी है, बल्कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री और उसकी गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और 4700 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट की पोल पहली ही बारिश ने खोल कर रख दी है।

उन्नाव के कोरारी के पास धंसी सड़क

मिली जानकारी के अनुसार, कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन में उन्नाव के कोरारी इलाके के पास मिट्टी धंसने के कारण सड़क का एक हिस्सा नीचे की ओर दब गया है। सड़क धंसने की वजह से वहां लंबी-लंबी दरारें बन गई हैं और उन दरारों में बारिश का पानी भरा हुआ साफ देखा जा सकता है। सड़क की इस हालत के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क पहली ही बारिश को झेलने में असमर्थ रही। मिट्टी के धंसने से सड़क की सतह असंतुलित हो गई है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के लिए खतरा पैदा हो गया है।

हाई-प्रोफाइल उद्घाटन और प्रोजेक्ट का विवरण

इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन बीते 13 जुलाई 2026 को बेहद भव्य तरीके से किया गया था। इस कार्यक्रम में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए थे। उस समय इस प्रोजेक्ट को उत्तर प्रदेश की प्रगति के एक नए अध्याय के रूप में पेश किया गया था और यह लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 63 किलोमीटर लंबा है और इसे 6-लेन के हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का मुख्य उद्देश्य लखनऊ और कानपुर के बीच की दूरी को कम करना था, जिससे पहले लगने वाला 2 से 3 घंटे का समय घटकर अब मात्र 35 से 40 मिनट रह गया है।

विपक्ष के तीखे हमले और भ्रष्टाचार के आरोप

एक्सप्रेसवे के धंसने की खबर मिलते ही विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल ने सोशल मीडिया पर क्षतिग्रस्त सड़क का वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिस ग्रीनफील्ड कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था, वह 12 दिन के अंदर ही धंस गया है। सपा ने आरोप लगाया कि भाजपा जनता के खून-पसीने की कमाई और हजारों करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन को लूटकर देश को खोखला कर रही है। उन्होंने सरकार की ईमानदारी के दावों को महज एक दिखावा करार दिया।

सत्ता पक्ष की सफाई और बचाव

विपक्ष के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए सदर विधायक ने सरकार का बचाव किया है और विधायक ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर पूरी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब कोई नई सड़क बनती है, तो पहली बारिश के दौरान इस तरह की कुछ तकनीकी दिक्कतें आना सामान्य बात है। विधायक ने आश्वासन दिया कि जहां भी सड़क खराब हुई है, उसे तुरंत ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई एजेंडा नहीं है और वे केवल नकारात्मकता फैलाने का काम कर रहे हैं।

निर्माण एजेंसी की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

सड़क धंसने का मामला तूल पकड़ते ही निर्माण एजेंसी हरकत में आ गई है। एजेंसी की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि जहां सड़क खराब हुई थी, वहां मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। निर्माण एजेंसी ने बताया कि प्रभावित हिस्से पर पैच वर्क कर दिया गया है ताकि यातायात में कोई बाधा न आए। हालांकि, पैच वर्क के बावजूद स्थानीय लोगों और यात्रियों के मन में सड़क की मजबूती को लेकर संदेह बना हुआ है। 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 6-लेन की सुविधा दी गई है, लेकिन उद्घाटन के इतने कम समय में ही मरम्मत की नौबत आना इंजीनियरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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