कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया है कि पार्टी के लगभग 80 से 90 विधायकों ने आलाकमान से उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपने का अनुरोध किया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सिद्धारमैया सरकार अपने कार्यकाल के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। इस राजनीतिक हलचल के बीच, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दो दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, जहां उनके पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिलने की संभावना है।
नेतृत्व परिवर्तन की मांग और आंतरिक गुटबाजी
कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग डीके शिवकुमार को शीर्ष पद पर देखना चाहता है और उन्होंने कहा कि विधायकों ने अपनी इच्छा आलाकमान तक पहुंचा दी है। हुसैन के अनुसार, यह मांग किसी विद्रोह का संकेत नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डीके शिवकुमार ने राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है और अब उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।
यतींद्र सिद्धारमैया के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया
विधायक इकबाल हुसैन ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे और पूर्व विधायक यतींद्र सिद्धारमैया द्वारा दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की है। यतींद्र ने हाल ही में दावा किया था कि आलाकमान ने सिद्धारमैया को पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहने की अनुमति दे दी है। इस पर हुसैन ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी से पार्टी के भीतर अनुशासन भंग होता है और आलाकमान असहज स्थिति में आ जाता है। उन्होंने यतींद्र को सलाह दी कि वे सार्वजनिक रूप से ऐसे दावे करने के बजाय पार्टी की गरिमा का ध्यान रखें।
डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा और राजनीतिक निहितार्थ
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे एक सामान्य दौरा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे आलाकमान के साथ सत्ता के बंटवारे (Power Sharing Formula) पर चर्चा कर सकते हैं। शिवकुमार ने यतींद्र सिद्धारमैया के बयानों पर संयमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे सभी के विचारों का सम्मान करते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को ही लेना है। शिवकुमार का यह रुख उनकी परिपक्वता और आलाकमान के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और भविष्य की राह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कर्नाटक कांग्रेस में यह खींचतान नई नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनावों में भारी जीत के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता के संतुलन को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि नवंबर 2025 में सरकार के ढाई साल पूरे होने पर नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। वर्तमान में गृह मंत्री जी परमेश्वर भी इस दौड़ में एक महत्वपूर्ण नाम के रूप में उभरे हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है।
निष्कर्षतः, कर्नाटक में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर है। जहां एक ओर सिद्धारमैया खेमा स्थिरता का हवाला दे रहा है, वहीं शिवकुमार समर्थक 'वादे' और 'योगदान' के आधार पर बदलाव की मांग कर रहे हैं। अब पूरी नजरें दिल्ली में होने वाली बैठकों और कांग्रेस आलाकमान के अगले कदम पर टिकी हैं, जो राज्य सरकार के भविष्य की दिशा तय करेगा।